
जयपुर. द फ्यूचर सोसायटी एवं यूनिसेफ़ की ओर से गुरुवार को इंदिरा गांधी पंचायत भवन में 'जेंडर सेंसिटिव राजस्थान' अभियान पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। इसमें महिला मुद्दों और लैंगिक संवेदनशीलता विषय पर पत्रकारों और पत्रकारिता के विद्यार्थियों ने प्रशिक्षण लिया। आयोजक रविता शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान लघु फिल्म के जरिए पत्रकारों को महिला मुद्दों पर संवेदनशील तरह से रिपोर्टिंग और लिखने व समझने की जानकारी दी।
यह पूरे समाज का मुद्दा
यूनिसेफ़ की राजस्थान प्रमुख इसाबेल बार्डम ने कहा कि लैंगिक संवेदनशीलता न सिर्फ महिला का बल्कि पूरे समाज का मुद्दा है। मीडिया एक शक्तिशाली माध्यम है, जिसके माध्यम से महिलाओं के पिछड़ेपन को दूर किया जा सकता है। पीआईबी की सहायक महानिदेशक रितु शुक्ला ने कहा कि मीडिया पुरुष प्रधानता है यहां महिलाओं की भागीदारी बराबर होनी चाहिए। राजस्थान के हालात पर कहा कि यह हैरान करने वाली बात है कि आजादी के इतने वर्षों के बाद भी यहां लैंगिक समानता नहीं है।
मिले 50 फीसदी आरक्षण
वरिष्ठ पत्रकार त्रिभुवन ने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कहते हैं। लेकिन, जब वे आधी आबादी हैं तो उन्हें 50 फीसदी हिस्सेदारी क्यों नहीं दी जाती है। शिक्षाविद् अमित अग्रवाल ने कहा कि लैंगिक असमानता का मुद्दा राजस्थान में हमेशा से रहा है। वरिष्ठ पत्रकार एवं लैंगिक मुद्दों में विशेषज्ञ नसीरुद्दीन विभिन्न गतिविधियों और फिल्म प्रदर्शन के माध्यम से ने लैंगिक समानता की बारिकीयां बतायी। कार्यशाला में संवाद कर महिला मुद्दों पर विद्यार्थियों की बेहतर तरह से समझाया। समाज ही लैंगिक भेद भाव पैदा करता है।
Published on:
03 Nov 2023 10:08 am

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