
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर के दुर्गापुरा ऑडिटोरियम में आयोजित सरपंच संघ के आभार कार्यक्रम में पंचायत व्यवस्था और सरपंचों की भूमिका पर खुलकर बात की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वह स्वयं सरपंच थे, तब उनके पास बाइक तक नहीं थी, लेकिन आज गांवों में बदलाव की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने सरपंचों को गांव के विकास की रीढ़ बताया और सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारने में उनकी अहम भूमिका को रेखांकित किया।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि गांवों में विकास योजनाओं को जमीन पर उतारने का सबसे बड़ा दायित्व सरपंचों का होता है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का वास्तविक क्रियान्वयन पंचायत स्तर पर ही होता है। उन्होंने कहा, 'सरपंच गांव के लोगों के लिए आशा और उम्मीद का प्रतीक होता है। पंचायत में जो भी काम होता है, वह सरपंच के माध्यम से ही होता है।'
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जब कोई काम अच्छा होता है तो उसका श्रेय भी सरपंच को मिलता है और यदि कोई कमी रह जाए तो उसकी जिम्मेदारी भी सरपंच पर ही आती है।
सीएम शर्मा ने सरपंच पद की सामाजिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि सरपंच का कार्यकाल भले ही पांच साल का होता है, लेकिन उसकी पहचान और जिम्मेदारी जीवन भर जुड़ी रहती है। उन्होंने कहा कि सरपंच का नाम गांव के विकास से जुड़ा होता है और उसकी छवि गांव की प्रगति का प्रतिबिंब बन जाती है।
मुख्यमंत्री ने अपने सरपंच बनने के दिनों को याद करते हुए भावुक अंदाज में कहा, 'जब मैं सरपंच था, तब मेरे पास बाइक भी नहीं थी। आज शायद आप लोगों के पास कारें हैं।' उन्होंने इसे ग्रामीण भारत में आए विकास का प्रतीक बताया और कहा कि आज गांवों में सुविधाएं बढ़ी हैं, जिससे ग्रामीण जीवन में बड़ा परिवर्तन आया है।
मुख्यमंत्री ने सरपंचों को सेवा भाव से काम करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जब भी कोई ग्रामीण अपनी समस्या लेकर आए, तो सरपंच को उसकी हर संभव मदद करनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'आप एक सेवक हैं और सेवक को दर्द सेवक ही समझ सकता है।'
सीएम शर्मा ने कहा कि सरकार की कोई भी योजना तभी सफल होगी, जब पंचायत स्तर पर उसे ईमानदारी और समर्पण के साथ लागू किया जाए।
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की प्राथमिकताओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सरकार बनने के बाद सबसे पहले विकास का रोडमैप तैयार किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने जरूरतों का नक्शा बनाया और उसमें सबसे बड़ी प्राथमिकता पानी और सिंचाई को दी गई।
सीएम शर्मा ने कहा, 'दो साल पहले सरकार बनी तो हमने अपना रोडमैप बनाया। हमने देखा कि हमारी जरूरत क्या है। सबसे पहले हमने पानी और सिंचाई के लिए रोडमैप तैयार किया।' उन्होंने जल संकट और कृषि के लिए सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य गांवों को आत्मनिर्भर बनाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। पंचायतों को सशक्त बनाकर ही विकसित राजस्थान का सपना पूरा किया जा सकता है। उन्होंने सरपंचों से अपील की कि वे सरकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएं और गांव के हर नागरिक को विकास की मुख्यधारा से जोड़ें।
इस कार्यक्रम का आयोजन ‘जी राम जी’ योजना लागू करने पर सरपंच संघ की ओर से आभार व्यक्त करने के लिए किया गया था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सरपंच और पंचायत प्रतिनिधि मौजूद रहे। सरपंच संघ ने सरकार के ग्रामीण विकास प्रयासों और पंचायतों को सशक्त बनाने की पहल की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने सरपंचों को जिम्मेदारी और जवाबदेही का संदेश देते हुए कहा कि पंचायत प्रतिनिधि जनता के प्रति जवाबदेह हैं। उन्होंने कहा कि सरपंचों को गांव के विकास के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द, पारदर्शिता और संवेदनशीलता को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।
Updated on:
02 Feb 2026 04:51 pm
Published on:
02 Feb 2026 04:02 pm

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