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अगले साल होंगे JIIF के दो सैपरेट वर्जन: हनु रोज

कोविड की चुनौतियों के बीच Jaipur international film festival के 14वें संस्करण का मंगलवार को समापन हुआ। इससे पूर्व मंगलवार को 8 देशों की 22 फिल्मों की ऑफलाइन स्क्रीनिंग की गई। पांच दिन तक इस फेस्ट में 52 देशों की 279 फिल्मों की ऑफ लाइन और ऑन लाइन स्क्रीनिंग हुई। फेस्ट में लगभग 70 फिल्मों के फिल्मकार,निर्माता और अभिनेताओं ने शिरकत की।

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Jan 11, 2022


पांच दिवसीय जिफ का समापन
52 देशों की 279 फिल्मों की ऑफ लाइन और ऑन लाइन स्क्रीनिंग हुई
जयपुर।
कोविड की चुनौतियों के बीच Jaipur international film festival के 14वें संस्करण का मंगलवार को समापन हुआ। इससे पूर्व मंगलवार को 8 देशों की 22 फिल्मों की ऑफलाइन स्क्रीनिंग की गई। पांच दिन तक इस फेस्ट में 52 देशों की 279 फिल्मों की ऑफ लाइन और ऑन लाइन स्क्रीनिंग हुई। फेस्ट में लगभग 70 फिल्मों के फिल्मकार,निर्माता और अभिनेताओं ने शिरकत की।
जिफ के फाउंडर डायरेक्टर हनु रोज ने कहा कि अगले साल से जिफ के दो सैपरेट वर्जन ऑफ लाइन और ऑनलाइन आयोजित किए जाएंगे। ऑनलाइन संस्करण, ऑफ लाइन संस्करण की तर्ज पर ही होगा इसमें वह सभी आयोजन होंगे जो ऑफ लाइन होते हैं जैसे फिल्म मेकर्स और प्रोड्यूसर्स मीट, फिल्म मार्केट मीट विभिन्न विषयों पर आधारित टॉक शोज़ और फिल्मों की स्क्रीनिंग आदि। ऐसे में जो फिल्मकार किसी वजह से उत्सव में शामिल नहीं हो पाएं हैं उन्हें घर बैठे ही वह सब कुछ देखने और समझने को मिलेगा।
फेस्ट से हो रहा संस्कृतियों का मेलजोल: गोक्सेल गुलेनसॉय
अंतिम दिन फिल्ममेकर्स के बीच चली चर्चा में फिल्म मेकर गोक्सेल गुलेनसॉय ख्टर्की ने कहा कि मेरी फिल्म मदर इन लॉ सदन हानिम को अल्जाइमर्स के दौरान हुए दुखद अनुभवों और धीरे धीरे याद्दाश्त खोते जाने के समय को दर्ज करती है। इस मुश्किल वक्त को डॉक्यूमेंट करना कठिन था और फिल्म बनने के बाद स्पॉन्सर्स तलाशना और भी मुश्किल। और अब हमारी फिल्म जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ख्जिफ, में ना सिर्फ दिखाई गईए बल्कि इसे कई पुरस्कारों से भी नवाज़ा गया। फिल्म निर्देशकों और निर्माताओं के लिए इस तरह के फेस्ट होना जरूरी है इससे कई देशों की संस्कृतियों का मेलजोल होता है।
जयपुर बन रहा देश की फिल्म कैपिटल: नीरज ग्वाल
फिल्म मेकिंग के लिए कोई फॉर्मल कोर्स किए बिना सिनेमा की दुनिया में अपनी पहचान बना रहे नीरज ग्वाल ने कहा कि सिनेमा की दुनिया को लेकर मेरा जुनून मुझे फिल्मों तक लेकर आया। उनका कहना था कि जयपुर को भारत की कल्चरल कैपिटल माना जाता है और अब यह देश की फिल्म कैपिटल बनने की ओर बढ़ रहा है। एक फिल्म फेस्टिवल की सार्थकता इसमें होती है कि इसके ज़रिए ग्लोबल फिल्म कल्चर को बढ़ावा मिले, नए फिल्मकारों के ताज़ातरीन विचार और फिल्में लोगों तक पहुंचे।
फिल्म मेकिंग में मिला महिलाओं का साथ: दीप्ति घाटगे
फेस्ट में फिल्मकारों के मध्य चर्चा के दौरान फिल्म मेकर दीप्ति घाटगे ने कहा कि फिल्म के ज़रिए औरतों के दर्द को बयां करना और फिल्म मेकिंग प्रक्रिया में महिलाओं का साथ मिलना मेरी उपलब्धि रही है।

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