29 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मां ने की कठोर मेहनत, ऑटिस्टिक बेटे को मिला फल, बोर्ड परीक्षा में पाएं 86 फीसदी नंबर

दुर्गापुरा निवासी ईशान (20) की मां मंजू शर्मा आज भी अपने बेटे के साथ साए की तरह रहती है, रोजाना उसे 15 किलोमीटर दूर स्कूल छोडऩे और लेने जाती है

2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Deepshikha

May 12, 2019

jaipur

मां ने की कठोर मेहनत, ऑटिस्टिक बेटे को मिला फल, बोर्ड परीक्षा में पाएं 86 फीसदी नंबर

जया गुप्ता / जयपुर. हर मां अपने बच्चे की बचपन में अंगुली थामे चलती है। जब बच्चे बड़े होने लगे, तब वे खुद अपनी उड़ान भरते हैं। लेकिन, दुर्गापुरा निवासी ईशान (20) की मां मंजू शर्मा (46) आज भी अपने बेटे के साथ साए की तरह रहती है। कारण, ईशान ऑटिज्म से पीडि़त हैं। मंजू की दुनिया ईशान तक ही सीमित है। मंजू की मेहनत के कारण ही ईशान ने दसवीं बोर्ड परीक्षा में 86 फीसदी नंबर हासिल किए हैं।

मंजू ने बताया, 'ईशान चार-पांच साल का था, तब हमें पता चला कि उसे ऑटिज्म है। उस समय वह प्ले स्कूल में जाता था। लेकिन, बोल नहीं पाता था। आई-कॉन्टेक्ट नहीं कर पाता था। डॉक्टर्स ने बताया कि उसे ऑटिज्म है। मेरी हाउसिंग बोर्ड में सरकारी नौकरी है। लेकिन, मेरे लिए बेटा प्राथमिक है और नौकरी द्वितीयक। धीरे-धीरे इलाज के बाद उसके व्यवहार में बदलाव आने लगा। तब बनीपार्क स्थित एक स्कूल में स्पेशल टीचर का पता लगने पर उसे स्कूल बिठाया।

जैसे मेहनत का फल मिल गया

बनीपार्क स्थित स्कूल में एडमिशन करनवाने के बाद सबसे बड़ी बात उसे लाने ले जाने की थी। लेकिन बेट के आऐ ये परेशानी मुझे छोटी लगी उस दिन से रोजाना उसे 15 किलोमीटर दूर छोडऩे और लेने जाती हूं। ईशान को एक मिनट के लिए भी अकेला नहीं छोड़ सकते। इसीलिए कई बार बिना भुगतान की छुट्टियां ली है। इस साल दसवी कक्षा थी, सो पूरा साल ही छुट्टी ले ली। वह स्कूल में पढ़ता है, फिर उसे घर पर पढ़ाती हूं। जब उसने 86 प्रतिशत हासिल किए, तब लगा जैसे मेहनत का फल मिल गया।

मां भी हूं और दोस्त भी

मंजू ने बताया कि मैं ईशान की मां भी हूं आर दोस्त भी। ईशान का कोई दोस्त नहीं हैं। इसलिए मैं ही उसकी दोस्त बन गई हूं। उसे बैडमिंटन खेलना हो या साइकिल चलानी हो, मैं ही उसके साथ जाती हूं।

Story Loader