
इलेक्ट्रिकल इंडस्ट्री में सुधार की जरूरत, ध्यान नहीं दिया तो... निर्यात पर होगा असर
भारतीय इलेक्ट्रिकल इंडस्ट्री दशकों से खराब गुणवत्ता से ग्रस्त है। इस वजह से इसके उत्पाद वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे हैं। उद्योग का कहना है कि ऐसे में सरकार को हस्तक्षेप करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि घरेलू उत्पाद विश्व स्तर पर बराबरी वाले दर्जे के हों। भारतीय गुणवत्ता के भरोसे को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाना होगा और इससे उन वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी, जो भारत को चीन प्लस वन की रणनीति देखने के इच्छुक हैं। घरेलू बाजार को बेहतर उत्पाद और संबंधित सेवाएं देने की जरूरत है। इससे कलपुर्जों के आयात को कम करने में मदद मिलेगी, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी। बेहतर उत्पाद अच्छी कुशलता सुनिश्चित करेगा, जिससे लागत कम होगी और निर्यात करने की प्रतिस्पर्धा और बेहतर होगी।
उत्पादों के मानकों पर फिर से विचार की जरूरत
इलेक्ट्रिक उद्योग के जानकारों का कहना है कि भारत सरकार ने वर्तमान में मेक इन इंडिया का अभियान चला रखा है। इसलिए अपने देश के उत्पादों के मानकों पर फिर से विचार किये जाने की तुरंत जरूरत है। विशेष रूप से इलेक्ट्रिकल इंडस्ट्री से जुड़े प्रोडक्ट्स, खासकर तब जब हम अपना इंफ्रास्ट्रक्चर और इससे जुडी सुविधाओं को अपग्रेड करने के बारे में गंभीर हैं। उद्योग का कहना है कि यूरोप और अमेरिका में प्रचलित मौजूदा मानक को शामिल करने और उन्हें सख्ती से लागू करने की जरूरत है। अगर कोई भी विनिर्माता इन मानकों का पालन नहीं करता है तो उससे सख्ती से निपटा जाना चाहिए। भारत में लाखों घरों में इस्तेमाल होने वाले सामान्य वायर्स या केबल के मामले में बीआईएस अभी भी केवल पीवीसी इंसुलेटेड वायर्स पर ही नजर रखता है। ये पीवीसी इंसुलेटेड तार केवल 70 डिग्री सेंटीग्रेड का सामना कर सकते हैं।
तेज गर्मी से आग लगने की स्थिति
भारत जैसे देश जहां गर्मी के मौसम में कुछ हिस्सों का तापमान 50 डिग्री तक पहुंच जाता है। ऐसे में आग लगने की स्थिति में यह सुरक्षा की दृष्टि से एक बड़ा नकारात्मक फैक्टर माना जाता है। इसके अलावा यह पीवीसी इंसुलेशन जहरीला धुआं भी छोड़ता है जो दृश्यता को लगभग ना के बराबर कर देता है और इस धुएं में सांस लेने वाले व्यक्ति के स्वास्थ्य को खराब करता है। आंकड़ों के अनुसार इस तरह के खतरनाक हालातों में बिजली से लगी आग के कारण भारत में हर दिन 50 से अधिक लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है।
Published on:
16 Jan 2023 11:47 am

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