जयपुर

न राइट, न लेफ्ट विंग…संघ है नेशनलिस्ट :होसबाले

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विचार की दृष्टि से राइट विंग भी नहीं है और लेफ्ट विंग भी नहीं है, नेशनलिस्ट है। राइट और लेफ्ट यूरोप की पृष्ठभूमि में प्रारम्भ हुआ वह भारत के लिए लागू नहीं हो सकता। इसलिए वामपंथी विचार के लोगों को यह कहना पड़ रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने बुधवार को जयपुर में यह विचार व्यक्त किए। एकात्म मानव दर्शन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान की ओर से बिड़ला सभागार में आयोजित दीनदयाल स्मृति व्याख्यान में, ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ : कल, आज और कल’ विषयक व्याख्यान में होसबाले मुख्य वक्ता थे।

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Feb 02, 2023

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विचार की दृष्टि से राइट विंग भी नहीं है और लेफ्ट विंग भी नहीं है, नेशनलिस्ट है। राइट और लेफ्ट यूरोप की पृष्ठभूमि में प्रारम्भ हुआ वह भारत के लिए लागू नहीं हो सकता। इसलिए वामपंथी विचार के लोगों को यह कहना पड़ रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने बुधवार को जयपुर में यह विचार व्यक्त किए। एकात्म मानव दर्शन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान की ओर से बिड़ला सभागार में आयोजित दीनदयाल स्मृति व्याख्यान में, ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ : कल, आज और कल’ विषयक व्याख्यान में होसबाले मुख्य वक्ता थे।

उन्होंने कहा कि संघ रिजिड नहीं है, फ्लेक्सिबल है, इसलिए नई बात को सोचता है। अपने अंदर भी परिवर्तन लाता है। संघ भारत के सब मत पंथ सम्प्रदायों का सम्मान करता है। संघ स्वयं पंथ सम्प्रदाय नहीं बना। सब पंथ सम्प्रदाय अपने पंथ सम्प्रदाय की चीजों को बरकरार रखते हुए संघ कार्य कर सकते हैं । संघ को अध्ययन करने से नहीं अनुभव करने से समझेंगे। उन्होंने कहा कि भारत में रहने वाले सभी हिंदू हैं। सबका डीएनए एक हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत में संस्थान के अध्यक्ष डॉ. महेश चंद्र शर्मा ने प्रस्तावना रखी। कार्यक्रम में संघ और भाजपा के सभी बड़े पदाधिकारी पहुंचे। संघ के क्षेत्र प्रचारक निंबाराम, प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेंद्र, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया, वरिष्ठ नेता गुलाबचंद कटारिया, राजेंद्र राठौड़, अशोक परनामी, वासुदेव देवनानी सहित शहर के गणमान्य नागरिक कार्यक्रम में मौजूद रहे।

प्रतिबंध लगा पर आरोप मिथ्या साबित हुए
उन्होंने महात्मा गांधी की हत्या और आपातकाल के समय लगे प्रतिबंध की परिस्थितियों को बताया। उन्होंने कहा कि पहले प्रतिबंध के समय गांधी हत्या के मिथ्या आरोप लगे, जो बाद में गलत साबित हुए। आज भी कुछ लोग ऐसे आरोप लगाते हैं। आपातकाल में दूसरा प्रतिबंध लगा तो संघ के स्वयंसेवकों ने लोकतंत्र बचाने के लिए जो प्रयास किए, उसकी प्रशंसा हुई।

अस्पृश्यता के कलंक को करना होगा समाप्त
होसबाले ने कहा कि समाज परिवर्तन के लिए आज भी समरसता की चुनौती है। अस्पृश्यता के कलंक को अपनी इस पीढ़ी में समाप्त करने का संकल्प करना होगा। अगली पीढ़ी के लिए छोड़कर नहीं जाना है। हिंदु समाज को ऐसा संकल्प लेना होगा। यह सामाजिक कलंक हिंदु समाज का दोष है। इसके लिए और किसी पर दोषारोपण करने से कोई लाभ नहीं है, संघ ऐसा मानता है।

चुनौतियों का जिक्र

होसबाले ने कहा कि इलेक्ट्रोनिक, एआई, वर्चुअल वर्ल्ड जैसी चुनौतियां हैं। नौजवानों को जीवन के मूल्यों और संस्कार के साथ जोड़कर रखना परिवारों के साथ ही स्वाभाविक रूप से संघ के लिए भी बड़ी चुनौती है। उपभोगवाद भी बड़ी चुनौती है, क्योंकि जीवनशैली ऐसी बना दी है। हम सब इसके शिकार हैं। रास्ता क्या है? इस प्रकार की चुनौतियों को भी संघ एक दृष्टि से अपने कार्य के आयाम में लेने के लिए प्रयास कर रहा है।

न्यायापालिका भारत की मिट्टी के अनुरूप नहीं
होसबाले ने देश के पूर्व प्रधान न्यायधीश एन.वी. रमणा के भाषण का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि खुद चीफ जस्टिस रहे रमणा ने कहा था कि भारत की न्यायपालिका भारत की मिट्टी के अनुरूप नहीं है, इसका भारतीयकरण करना चाहिए।

Published on:
02 Feb 2023 12:01 pm
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