
नेपाल बदलेगा माउंट एवरेस्ट का बेस कैंप
काठमांडू. नेपाल (Nepal) माउंट एवरेस्ट बेस कैंप (Mount Everest base camp) को स्थानांतरित करने की तैयारी कर रहा है, क्योंकि जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियां (Global warming and human activity) इसे असुरक्षित बना रही हैं। वसंत ऋतु में जब पवर्तारोहण का उपयुक्त समय होता है, उस दौरान लगभग 1,500 लोग एवरेस्ट बेस कैंप में होते हैं। यह बेस कैंप तेजी से पिघल रहे खुंबू ग्लेशियर (Khumbu glacier) पर स्थित है। स्थानीय प्रशासन अब कम ऊंचाई पर एक नए स्थान की खोज कर रहा है, जहां सालभर बर्फ नहीं होती।
बेस कैंप में दिखने लगी हैं दरारें
नेपाल सरकार (Nepali government) द्वारा गठित समिति की ओर से नए बेस कैंप की सिफारिश की गई है। स्थानीय समुदायों के साथ उनकी संस्कृति जैसे अन्य पहलुओं पर विचार करने के बाद यह स्थानांतरण वर्ष 2024 तक हो सकता है। पर्वतारोहियों को यहां सोते समय खतरनाक दरारें दिखाई दे रही हैं।
जलधारा का हो रहा विस्तार
अधिकांश ग्लेशियर चट्टानी मलबे से ढके हुए हैं, लेकिन बर्फीले क्षेत्र भी हैं, जिन्हें बर्फ की चट्टानें कहा जाता है। बर्फ की इन चट्टानों का पिघलना ही ग्लेशियर को सबसे ज्यादा अस्थिर बनाता है। जब बर्फ की चट्टानें पिघलती हैं तो इनके ऊपर का मलबा भी गिरता है और जल निकाय बन जाते हैं। बेस कैंप के ठीक बीच में एक धारा का लगातार विस्तार हो रहा है।
'खुंबू ग्लेशियर' बेस कैंप
Published on:
19 Jun 2022 02:50 am
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