
‘सांसद और विधायक के लिए बाध्यता नहीं, पंचायतीराज के लिए अनिवार्य’
‘सांसद और विधायक के लिए बाध्यता नहीं, पंचायतीराज के लिए अनिवार्य’
- विधानसभा में उठी पंचायतीराज चुनाव में तीसरी संतान की बाध्यता समाप्त करने की मांग
जयपुर। विधानसभा (Rajasthan Assembly) में संविधान पर चर्चा के लिए बुलाए गए विशेष सत्र में गुरुवार को पंचायतीराज (Panchayati Raj) का चुनाव लडऩे के लिए तीन संतानों (Three Children) की बाध्यता (Obligation) हटाने की मांग भी उठी। गुडामलानी विधायक हेमाराम चौधरी ने कहा कि पिछल भाजपा सरकार में दो कानून पास हुए, जिसमें एक चुनाव लडऩे के लिए दसवीं पास होना जरूरी और दूसरा तीसरी संतान नहीं होनी चाहिए। अब कांग्रेस सरकार ने शिक्षा वाला कानून तो हटा दिया, लेकिन अभी तीन संतान वाला कानून नहीं हट पाया। इसके लिए सरकार इस कानून को हटाकर राहत दें।
विधायक चौधरी ने कहा कि आज संविधान पर चर्चा की जा रही है, जिसमें समानता की बात कही गई है, लेकिन यहां समानता की जगह भेदभाव किया जा रहा है। सांसद और विधायक के लिए संतान की कोई बाध्यता नहीं है, लेकिन पंचायतीराज में चुनाव लडने के लिए इसे अनिवार्य किया गया है, जो लोकतंत्र के हित में नहीं है। पूर्ववर्ती सरकार ने हो सकता है जनसंख्या नियंत्रण के लिए इसे लागू किया हो। इसकी समीक्षा करोगे तो पाओगे कि इसका जनसंख्या नियंत्रण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। इससे चुनाव लडऩे वाले नहीं रूक रहे हैं। सरकार को इसे वापस लेना चाहिए।
‘नहीं तो भेड़-बकरी चरा रहे होते’
संविधान पर चर्चा की बात करते हुए विधायक चौधरी ने कहा कि संविधान के चलते ही हम यहां तक पहुंच पाए हैं, संविधान नहीं होता तो मैं यहां नहीं पहुंच पाता, कहीं भेड-बकरी चरा रहे होते।
Published on:
28 Nov 2019 08:46 pm
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