
- विजय शर्मा
जयपुर। नया जयपुर बनाने के उद्देश्य से विद्याधरनगर बसाया गया था। इस क्षेत्र में अभी 2 बार ही विधानसभा चुनाव हुए हैं। दोनों बार भाजपा ने जीत दर्ज की। ऐसे में एक बार तो लगा कि विकास मुुंह से बोल रहा होगा लेकिन इलाके में पहुंचा तो हकीकत समझ आने लगी। झोटवाड़ा पुलिया पर जाम के बीच जैसे-तैसे सीकर रोड पर आया तो बाइक हिलकोचे लेती चल रही थी।
सडक़ किनारे रुका और टी-स्टॉल से पानी की बोतल खरीदी। सीकर रोड पर नजर आ रही बीआरटीएस के बारे में पूछा तो दुकानदार बोला, यह काम तो बढिय़ा हो गया इलाके में। मैं कुछ कहने ही वाला था कि दुकानदार ने बात काट दी। बोला, भैया यह मौत की योजना है। सर्कल से लेकर 14 नंबर तक 8 कट हैं। हर कट पर दुर्घटना पक्की है। आप भी देख कर जाना। पैसे दिए और मैं निकल गया
सेन्ट्रल स्पाइन इलाके की ओर। साठ से सौ फीट चौड़ी सडक़ों के दोनों ओर बड़ी संख्या में स्थित मॉल लोगों को आकर्षित करते हैं। इनमें पांच हजार से अधिक व्यापारी हैं। सोचा सबसे पहले व्यापारियों की नब्ज टटोली जाए। एक मॉल के बाहर बाइक खड़ी कर ही रहा था कि स्थानीय व्यापारी सुरेन्द्र यादव, मुकेश स्वामी, प्रदीप अग्रवाल से मुलाकात हो गई। अस्त-व्यस्त पार्किंग पर चर्चा हुई। सुरेन्द्र यादव बोले भाईसाहब नए जयपुर में विकास और सुविधाओं की बात तो बाद में करना, पहले पांच हजार व्यापारियों को पानी की व्यवस्था करा दो। प्यासे हैं बेचारे। सरकार ने बीसलपुर की लाइन तो बिछा दी लेकिन पानी हलक तक नहीं पहुंचा पाई। पास खड़े प्रदीप अग्रवाल से रहा नहीं गया। बोलने लगे, इस नए जयपुर का यह बाजार वर्षों से अंधेरे में था। दो साल पहले ही लाइटें लगी हैं।
व्यापारियों की बात सुन आगे बढ़ा तो थोड़ी दूर ही व्यापारियों का समूह गुप्तगू करता दिखा। पास बैठा तो वे दशहरा मेले की तैयारियों पर चर्चा कर रहे थे। समूह में शामिल थे महेन्द्र गोयल, आनंद गुप्ता, राजेश चौधरी, अंकुर अग्रवाल, रोहित गोयल।
चुनाव के बारे में पूछा तो जवाब मिला नया क्या है, वही होगा जो होता आया है। मैं इशारा समझ गया, फिर भी पूछा- ऐसा क्यों? इस पर महेन्द्र गोयल बोले देखो जी, सामान्य वर्ग की सीट है। वैश्य, ब्राह्मण और राजपूत ज्यादा हैं। तीनों का झुकाव जहां होगा, उसी के सिर ताज होगा। विकास संबंधी सवाल पर सभी ने सडक़, बिजली, पानी, सीवरेज पर तो सहमति दी लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य पर मौन हो
गए। फिर महेन्द्र गोयल बोले सैटेलाइट अस्पताल के लिए प्रयास हुए, झोटवाड़ा पंचायत समिति की जगह भी तय हो गई लेकिन इसके बाद प्रक्रिया अटक गई। इस दौरान अनामिका सैन भी चर्चा में शामिल हो गईं। जाहिर है, महिला सुरक्षा की बात उठनी थी। कहने लगीं, चेन स्नेचिंग और बाइक चोरी की घटनाएं आए दिन हो रही हैं। कई कॉलेज हैं, फिर भी पुलिस गश्त नहीं होती। इसी दौरान आनंद गुप्ता बोले, झोटवाड़ा औद्योगिक एरिया सबसे पुराना है। वहां तीन हजार कर्मचारी, 10 हजार मजदूर और 300 कारखाने हैं। लेकिन डिस्पेंसरी तक नहीं है। उद्योगों की बात छिड़ी तो अंकुर गुप्ता बीच में बोल पड़े, वीकेआइ को क्या मिला? सडक़ तो अभी भी बनी है। खराब नालियां और डंपिंग यार्ड के लिए हम आज भी संघर्ष कर रहे हैं।
यहां से मैं मुरलीपुरा स्कीम की ओर निकला। जमुनापुरी पार्क के बाहर रुका तो लोगों की भीड़ थी। वहां बैंच पर बैठा और पहले से चल रही चुनावी चर्चा मैं शामिल हो गया। पास बैठे अर्पित खंडेलवाल से सबसे बड़ी समस्या पूछी तो सभी लोग एक स्वर में कहने लगे, भगवान की पूजा जितना पानी भी नहीं मिलता। सोच लो पीने के लिए कहां से व्यवस्था करते होंगे। कारण पूछा तो चतर सिंह नरूका नेताओं पर प्रहार करने लगे, दुर्भाग्य है कि वोट चेहरे को नहीं पार्टी को देखकर दिए जाते हैं। बार-बार जिताने के बावजूद जनता को उनके दर्शन नसीब नहीं होते।
Published on:
20 Oct 2018 10:54 am

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