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Red chillie price down: लालमिर्च नहीं हुई लाल, आवक बढ़ी, दाम टूटे

देश की प्रमुख उत्पादक मंडियों में इन दिनों लालमिर्च की आवक बढ़ने से इसकी कीमतों में दस रुपए प्रति किलो से भी ज्यादा की गिरावट आ गई है। अन्य राज्यों के साथ-साथ आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना में भी अच्छी बारिश की खबरें मिल रही हैं।

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Red chillie price down:  लालमिर्च नहीं हुई लाल, आवक बढ़ी, दाम टूटे

Red chillie price down: लालमिर्च नहीं हुई लाल, आवक बढ़ी, दाम टूटे

देश की प्रमुख उत्पादक मंडियों में इन दिनों लालमिर्च की आवक बढ़ने से इसकी कीमतों में दस रुपए प्रति किलो से भी ज्यादा की गिरावट आ गई है। अन्य राज्यों के साथ-साथ आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना में भी अच्छी बारिश की खबरें मिल रही हैं। बारिश के चलते लालमिर्च की उपभोक्ता मांग में नरमी के कारण भी भावों में मंदी को बल मिल है। राजधानी कृषि उपज मंडी स्थित व्यापारियों का कहना है कि वर्तमान में 334 डंडीकट 280 रुपए तथा वंडरहाट डंडीकट लालमिर्च के भाव 350 रुपए प्रति किलो बोले जा रहे हैं। गुंटूर तेजा पत्ता मिर्च 160 रुपए प्रति किलो बेची जा रही है।
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना देश में लालमिर्च के सबसे बड़े उत्पादक राज्य हैं। इन दोनों राज्यों में हाल ही में हुई अच्छी बारिश के कारण लालमिर्च की नई फसल में फिलहाल कोई भी नुकसान की खबर नहीं है। अलबत्ता हाल ही में आई तेजी के बाद किसानों की लालमिर्च में बिक्री बढ़ गई है। यहीं कारण है कि गुंटूर मंडी में लालमिर्च की दैनिक आवक बढ़कर वर्तमान में 60 हजार बोरी पहुंच गई है। आवक बढ़ने से उठाव तुलनात्मक रूप से घटा है, लिहाजा भावों में गिरावट देखने को मिल रही है। जानकारों का कहना है कि भविष्य में ऊंची कीमत मिलने की उम्मीद से आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना के किसानों ने बीते कुछ समय से लालमिर्च की बिक्री सीमित कर दी थी। यही कारण रहा कि इस बार नई फसल शुरू होने के बाद भी हाजिर में इस प्रमुख किराना जिंस की कीमतें ऊंची बनी हुई थीं। हैरानी की बात तो यह है कि सीजन के प्रारंभ से लेकर अभी तक किसानों द्वारा भारी बिकवाली बढ़ाए जाने के बाद भी गुंटूर समेत अन्य बड़ी मंडियों में लालमिर्च के भाव अपेक्षाकृत मजबूत ही चल रहे हैं।

गुंटूर में होता है मिर्च का सबसे ज्यादा उत्पादन
बता दें कि मिर्च का सबसे ज्यादा उत्पादन देश में आंध्रप्रदेश के गुंटूर जिले में होता है। यहां पूरे राज्य की 30 से 40 प्रतिशत मिर्च पैदा होती है, लेकिन इस बार यहां भी मिर्च का उत्पादन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। इसके अलावा तेलंगाना में भी मिर्च की खेती अधिक होती है वहां भी इस फसल में रोग का प्रकोप होने से पैदावार कम हुई है। कुल मिलाकर मिर्च की पैदावार घटने से इसके बाजार भावों में भारी उछाल आ रहा हैै। इसका लाभ किसान उठा सकते हैं। वहीं व्यापारियों को अभी और तेजी आने की उम्मीद बनी हुई है जिससे वे मिर्च का स्टॉक कर रहे हैं।

घरेलू मांग बढ़ने से और बढ़ेंगी कीमतें
जैसे-जैसे मिर्च की घरेलू मांग बढ़ेगी तो इसकी कीमतों में भी उछाल आता जाएगा। इन दिनों उन किसानों को मिर्च की कम पैदावार के बाद भी खासा लाभ मिल सकता है, जिन्होंने इसकी खेती की है। किसानों के अलावा व्यापारी भी मिर्च का स्टॉक करने में जुट गए हैं। चूंकि अभी मिर्च की नई फसल आने में काफी देरी है, इसलिए किसानों को चाहिए कि वे उचित समय देख कर मिर्च का बेचान करना शुरू कर दें।

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