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Ranthambore Forest: वन की रखवाली में साइकल से गश्त, सुरक्षा के लिए सिर्फ डंडे का आसरा

एक ओर जब शिकारी आधुनिक संसाधनों का उपयोग करने लगे हैं तब प्रदेश में वन विभाग वर्षों पुरानी साइकिल से गश्त व्यवस्था को लागू किए हुए है। विभाग की ओर से वन रक्षकों को साइकिल मेंटिनेंस के नाम पर 50 रूप्ए प्रतिमाह भत्ता दिया जाता है। बाजार में साइकिल के एक टायर का पंचर ही 20 रुपए में बनता है।

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जयपुर

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Amit Purohit

Jan 18, 2023

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सवाईमाधोपुर/पत्रिका न्यूज नेटवर्क . वन्यजीवों व वन संपदा की सुरक्षा को लेकर हैरत भरी और हास्यास्पद स्थिति है कि जंगलों की सुरक्षा में लगे वनकर्मियों को मात्र 50 रुपए का भत्ता मिलता है। ये भत्ता साइकिल भत्ते के नाम पर दिया जा रहा है। हालांकि ये बात दीगर है कि वनकर्मी साइकिल से रणथम्भौर अभयारण्य में गश्त नहीं करते। एक ओर जब शिकारी आधुनिक संसाधनों का उपयोग करने लगे हैं तब प्रदेश में वन विभाग वर्षों पुरानी साइकिल से गश्त व्यवस्था को लागू किए हुए है।

जंगल की सुरक्षा का जिम्मा निभाने वाले वनकर्मियों की वन विभाग की ओर से वर्षों बाद भी सुध नहीं लेने से उनमें रोष भी है। इन वनकर्मियों को महज 50 रुपए महीने का गश्त भत्ता मिलता है। वन कर्मियों की ओर से इस भत्ते को बढ़ाने की लगातार वर्षों से मांग की जा रही है। लेकिन अब तक सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया है। आधुनिकता के साथ अपराधी और अपराध का तरीका हाईटेक हो चुके हैं। लेकिन विभाग ने अपनी व्यवस्था में बदलाव न किया है। नतीजतन, जंगलों में अवैध खनन, कटाई, अतिक्रमण अन्य घटनाएं बढ़ रही है।

विभाग की ओर से वन रक्षकों को साइकिल मेंटिनेंस के नाम पर 50 रूप्ए प्रतिमाह भत्ता दिया जाता है। बाजार में साइकिल के एक टायर का पंचर ही 20 रुपए में बनता है। जबकि टयूब में हवा का चार्ज 5 रूपए वसूला जाता है। हालांकि साइकिल से जंगल की गश्त संभव नहीं है। न कोई गार्ड साइकिल से गश्त करता है। लगभग सभी गार्ड बाइक से आवाजाही करते हैं। ऐसे में उनको रोजाना एक लीटर पेट्रोल जेब से ही डलवाना पड़ता है। ऐसे में वनरक्षकों की ओर से अब पेट्रोल भत्ते की मांग जोर पकड़ने लगी है।

डंडे के भरोसे 1734 वर्ग किमी का इलाका:
रणथम्भौर 6 रेंजों में बंटा हुआ है और करीब 1734 वर्ग किमी में फैला है। अकेले वनरक्षक को बहुत बड़े इलाके की निगरानी करनी होती है। सुरक्षा के नाम पर उनके लिए हथियार मिले हुए नहीं है। महज एक डंडे के भरोसे वन सम्पदा की रक्षा करते हैं। जबकि समय के साथ अपराधी आधुनिक हथियारों से लैस होते हैं और उनके अपराध का तरीका भी हाईटेक हो चुका है। जंगल में घुसपैठ करने वाले खनन माफिया समूह में होते हैं। उनके पास धारदार हथियार व बंदूकें होती हैं। ऐसे में वन सम्पदा की बात दूर की रही, वनरक्षक को खुद की रक्षा करना मुश्किल होता है।

एक गार्ड पर 40 से 50 किमी. वन क्षेत्र का जिम्मा:
विभाग के मापदण्डों के अनुसार एक वनरक्षक पर 20 किमी. क्षेत्र की सुरक्षा का जिम्मा होता है। लेकिन रणथम्भौर अभयारण्य में स्टाफ की कमी के कारण एक वन रक्षक को 50 से 60 किमी तक सुरक्षा की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है। इतने बड़े वनक्षेत्र की सुरक्षा हथियार के बिना संभव नहीं है। इसके अलावा साइकिल से गार्ड को अपने वनक्षेत्र के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचने में करीब तीन से चार घंटे का समय लगेगा।

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