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सवाईमाधोपुर. नाबालिग से दुष्कर्म की कोशिश के मामले में पुलिस अनुसंधान से असंतुष्ट पोक्सो प्रकरण के विशेष न्यायालय ने संबंधित थाना पुलिस पर गंभीर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि 20 माह से अक्सर देखने में आया कि सवाईमाधोपुर जिले में नाबालिग बच्चियों के साथ लैंगिक दुव्र्यवहार की घटनाओं में ना केवल वृद्धि हो रही है, मुकदमा दर्ज करने में संबंधित थाना पुलिस द्वारा टालमटोल की जाती है। पीडि़त पक्ष पर आरोपी पक्ष से राजीनामे का दबाव बनाया जाता है। न्यायाधीश दिनेश कुमार गुप्ता ने आदेश में लिखा कि संबंधित थाना क्षेत्र में बनास में बजरी का अत्यधिक अवैध खनन होता है। पुलिस का यौन शोषण जैसे गंभीर प्रकरणों की त्वरित एवं निष्पक्ष जांच की तरफ ध्यान नहीं है।
इंस्पेक्टर को अहम पद देने के निर्णय पर करें पुनर्विचार
न्यायालय ने कहा कि उप निरीक्षक स्तर के थाने पर पुलिस निरीक्षक को एसएचओ लगाया गया है। जो प्रथम दृष्टया प्रशासनिक दक्षता नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने पुलिस महानिदेशक राजस्थान जयपुर को आदेश की प्रति भेजने के निर्देश के साथ सलाह दी है कि पुलिस इंस्पेक्टर जितेन्द्र सिंह को गंभीर मामलों के अनुसंधान से जुड़े किसी भी पद पर बनाए रखने के निर्णय पर पुर्नविचार किया जाए। साथ ही आगामी जांच के लिए आरोप-पत्र की पत्रावली पुलिस महानिरीक्षक भरतपुर को भेजने के आदेश भी दिए हैं। आदेशों की एक कॉपी पुलिस अधीक्षक सवाईमाधोपुर को भी भेजने के आदेश भी दिए हैं। साथ ही जांच रिपोर्ट 4 जुलाई तक न्यायालय में पेश करने के आदेश दिए हैं।
Published on:
25 Jun 2020 06:29 pm
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