script किसी को सरकारी में जाने की सलाह मिली तो किसी को खर्च करने पड़े हजारों रुपए | Some people got advice to go to government and some had to spend thous | Patrika News

किसी को सरकारी में जाने की सलाह मिली तो किसी को खर्च करने पड़े हजारों रुपए

locationजयपुरPublished: Feb 02, 2024 01:13:25 pm

Submitted by:

Vikas Jain

एक ही दिन में 200 से अधिक पीडि़तों ने पत्रिका को भेजी दोनों योजनाओं में इलाज नहीं मिलने की पीड़ा

परेशानी लोगों की जुबानी....किस तरह चिरंजीवी और आरजीएचएस में इलाज से उन्हें टरकाया जा रहा

sms_hospital_1.jpg
प्रदेश की स्वास्थ्य बीमा योजना के लिए सालाना प्रीमियम राशि जमा कराने वाले आमजन और राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) के तहत वेतन-पेंशन से कटौती करवाने वाले सरकारी कर्मचारियों की पीड़ा गुरुवार को राजस्थान पत्रिका में समाचार प्रकाशित होने के साथ ही सामने आने लगी है। "निजी अस्पतालों में बीमार लाचार, बीमा के बावजूद जेब पर प्रहार" शीर्षक से समाचार प्रकाशित होने के बाद एक ही दिन में प्रदेश भर से 200 से अधिक परिवेदनाएं पत्रिका को प्राप्त हुई हैं।
पीडि़तों के अनुसार चिरंजीवी बीमा के बावजूद किसी को निजी अस्पताल ने सरकारी अस्पताल में जाने की सलाह दी तो किसी को हजारों रुपए खर्च कर इलाज करवाना पड़ा। सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स ने कहा कि हर महीने उनके वेतन और पेंशन से पैसे तो कट जाते हैं, लेकिन इलाज के लिए निजी अस्पताल में जाने पर उन्हें लौटाया जा रहा है या पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
खर्च करने पड़े 64,675 रुपए

एक पीडि़त ने अपना नाम लिखे बिना बताया कि उनके यहां 18 नवंबर को पुत्र का जन्म हुआ। जन्म के साथ ही उसे ऑक्सीजन की जरूरत थी। लेकिन निजी अस्पताल ने इलाज से मना कर दिया और सरकारी जनाना अस्पताल में जाने की सलाह दे दी। उन्हें निजी अस्पताल में 64,675 रुपए खर्च करने पड़े
लोगों की पीड़ा...कुछ बानगी

भीलवाड़ा: आरजीएचएस योजना के तहत निजी अस्पताल ने इलाज से मना कर दिया, जवाब मिला...इस योजना में सही समय पर भुगतान नहीं मिलता है।

कोटा: निजी अस्पताल ने चिरंजीवी बीमा के तहत इलाज से मना किया, इसी अस्पताल ने निजी बीमा के कार्ड पर इलाज कर दिया। आरजीएचएस से कई दवाइयां और जांचों की सुविधा बिना कारण बंद कर दी गई हैं
- नीमकाथाना: स्यालोदड़ा गांव निवासी सुरेन्द्र जांगिड़ ने बताया कि पिछली सरकार में उन्हें चिरंजीवी योजना के तहत सुविधाएं मिल रही थी, लेकिन अब आयुष्मान भारत बीमा योजना की सूची में उनके पूरे परिवार सहित गांव के कई परिवारों के नाम नहीं है।
दिए सुझाव

- आरजीएचएस में दवाइयां समय पर और पूरी नहीं मिलती। जबकि वेतन-पेंशन में से पैसा लगातार कटता है। या तो पैसे कटना बंद हों या योजना सही तरीके से संचालित की जाए।
- आरजीएचएस में पुनर्भरण का विकल्प नियोक्ता को देना चाहिए या फिर पूरी तरह पिछली भाजपा सरकार की बीमा योजना लागू कर देनी चाहिए।
निजी अस्पतालों ने भी बताई अपनी परेशानी

- आरजीएचएस में दवा दुकानों और निजी अस्पतालों को भुगतान नहीं हो रहा, ऐसे में अस्पताल कैसे चल पाएंगे ?
- चिरंजीवी योजना में बीमा कंपनी बिना कारण क्लेम खारिज कर देती है, उसकी अपील पर भी सुनवाई नहीं होती।

ट्रेंडिंग वीडियो