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Theatre- उनकी चिठ्ठियों में दिखाई मानवीय संवेदना की झलक

जयपुर। नार्थ जोन कल्चरल सेंटर और डेल्फिक कॉउंसर ऑफ राजस्थान के सहयोग से आयोजित किए जा रहे 'रंगनाट्यम इंटिमेट थिएटर फेस्टिवल 'का समापन रविवार को रवींद्र मंच के मिनी थिएटर में तपन भट्ट लिखित नाटक उनकी 'चि_ियां' के बेहद मार्मिक मंचन के साथ हुआ।

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Jan 08, 2023

जयपुर। नार्थ जोन कल्चरल सेंटर और डेल्फिक कॉउंसर ऑफ राजस्थान के सहयोग से आयोजित किए जा रहे’ रंगनाट्यम इंटिमेट थिएटर फेस्टिवल’ का समापन रविवार को रवींद्र मंच के मिनी थिएटर में तपन भट्ट लिखित नाटक उनकी ‘चि_ियां’ के बेहद मार्मिक मंचन के साथ हुआ। स्माइल एंड होप संस्था के बैनर तले हुए इस मर्मस्पर्शी नाटक का निर्देशन डॉ. सौरभ भट्ट ने किया। नाटक में मानवीय संवेदनाओं, स्नेह और प्यार का सुन्दर समावेश था जिसमें पोस्टमेन द्वारा पढ़ी गई 4 चि_ियों में दो कहानियां दिखाई गईं। पहली कहानी में जहां एक विमंदित बच्चे और उसके भाई की जिंदगी का भावनात्मक चित्रण किया गया, वहीं दूसरी कहानी में एक आर्मीमेन की जिंदगी के दर्द भरे पहलुओं को उजागर किया गया।
नाटक का कथानक
नाटक के प्रारंभ में एक पोस्टमैन अपने दर्द को बयां करते हुआ बताता है कि आजकल खत और चि_ियां कोई लिखता ही नहीं, एक समय में प्यार और अपनेपन का एहसास होती थी चि_ियां इसके बाद फिर वो अपने झोले से कुछ ऐसी ही प्यार भरी कुछ चि_ियां निकालकर पढ़ता है और दर्शकों को दो कहानी सुनाता है ।

 

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पहली कहानी में भाईयों का आपसी टकराव
एक बच्चा चिंटू जो पैदायशी विमंदित है, जिसका सब उपहास उड़ाते हैं, वो अपने दूसरे भाई रोहन जो कि शारीरिक रूप से सामान्य है, से बहुत प्यार करता है लेकिन रोहन उससे नफरत करता है। उसे बात-बात पर मारता है, उसे अपना भाई नहीं दुश्मन समझता है और अपने मित्रों के साथ मिलके उसे जंगल में छोडऩे का प्लान बनाता है। अंत में चिंटू एक चि_ी लिखकर चला जाता है। नाटक में दर्शाया गया कि आज भी हमारे सभ्य सामाज में ऐसे अनेक लोग हैं जो जन्मजात विकलांगता का मजाक बनाते हैं अब चाहे वो विकलांगता शारीरिक हो या मानसिक। कहानी में दोनों भाइयों के इसी आपसी टकराव का अत्यंत भावनात्मक चित्रण नाटक में प्रस्तुत किया गया। चिंटू के रोल में नवीन टेलर, भाई के रोल में शाहरुख और मां के रोल में झिलमिल भट्ट ने अपने अभिनय से दर्शकों पर प्रभावित किया।

 

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दूसरी कहानी में फौजी की जिंदगी
नाटक की दूसरी कहानी में एक फौजी की जिंदगी का मार्मिक चित्रण किया गया। कहानी का मुख्य पात्र टॉम एक बहादुर सैनिक है और पूरी फौज का चहेता है । एक युद्ध के दौरान बुरी तरह घायल हो जाता है, डाक्टर उसे जैसे.तैसे बचाते हैं लेकिन ऑपरेशन से उसका चेहरा विकृत और भयानक हो जाता है। फौज के साथी उसे पहचानने से मना कर देते है और टॉम को मरा हुआ मान लेते हैं। टॉम ये जानने के लिए कि उसे घर में भी कोई पहचानेगा या नहीं, वो खुद का मित्र बन कर अपने घर जाता है और वहां भी उसे निराशा हाथ लगती है वो वापिस छावनी लौट आता है। वहां उसे उसे दुनिया के सबसे सुन्दर आदमी के नाम तीन पत्र मिलते हैं जो उसकी मां-बाप और पत्नी के होते हैं। जिसके बाद टॉम वापिस घर लौटता है। टॉम के किरदार को स्वयं निर्देशक डॉ. सौरभ भट्ट और उसके मन के किरदार को विशाल भट्ट ने बहुत ही खूबसूरती से निभाया। नाटक में विशाल भट्ट, नवीन टेलर, शाहरुख खान, झिलमिल भट्ट, कमलेश चंदानी,ऋचा पालीवाल, किरण केवट,सुमित सीलन, सुशील शर्मा, अंकित चंद्रावल,आदित्य पारीक, प्रकाश सोनी, अभिषेक झाँकल,महमूद अली ने अभिनय किया। प्रकाश व्यवस्था गगन मिश्रा और संगीत महेश जिलोवा ने दिया ।