Weather Forecast Update: ...इंतज़ार होगा ख़त्म- बरसेंगे बदरा, मौसम विभाग ने मानसून को लेकर जारी की तारीख

Weather Forecast Update: ...इंतज़ार होगा ख़त्म- बरसेंगे बदरा, मौसम विभाग ने मानसून को लेकर जारी की तारीख

Nakul Devarshi | Publish: May, 16 2019 10:46:42 AM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

Weather Forecast Update: ...इंतज़ार होगा ख़त्म- बरसेंगे बदरा, मौसम विभाग ने मानसून को लेकर जारी की तारीख

जयपुर/ नई दिल्ली।

मौसम विभाग के अनुसार इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून छह जून को केरल तट पर पहुंचेगा। विभाग ने बुधवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि सांख्यिकी मॉडलों के आधार पर यह संकेत मिल रहा है कि इस साल मानसून के केरल पहुंचने में थोड़ी देरी होगी। दक्षिण-पश्चिम मानसून के 6 जून को केरल पहुंचने का अनुमान है। इसमें चार दिन आगे-पीछे हो सकता है। इससे पहले मौसम पूर्वानुमान जारी करने वाली निजी कंपनी स्काईमेट ने मंगलवार को कहा था कि मानसून चार जून को केरल पहुंचेगा। उसने इसमें दो दिन आगे-पीछे होने की गुंजाइश बतायी थी।

 

तेरह साल में एक बार... 2015 में
वर्ष 2005 से 2018 के बीच सिर्फ एक बार 2015 में ऐसा हुआ है जब मौसम विभाग ने मानसून के आगमन का जो पूर्वानुमान जारी किया है वास्तविक आगमन उससे बहुत ज्यादा आगे-पीछे रहा हो। मानसून के केरल पहुंचने का सामान्य समय एक जून होता है।

 

93 फ़ीसदी बारिश होने का अनुमान
स्काईमेट ने एक दिन पहले ही 2019 में 93 प्रतिशत बारिश की संभावना जताई है। मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार इस साल भारतीय उप महाद्वीप में मानसून शुरुआती दौर में थोड़ा कमजोर रहेगा। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत तथा मध्य भारत में कम बारिश की आशंका है। जबकि उत्तर पश्चिम और दक्षिण भारत में स्थिति बेहतर होगी।


अंडमान पहुंचने में होगी देरी
मौसम विभाग का कहना है कि दक्षिणपूर्व मानसून इस बार अंडमान-निकोबार भी थोड़ा देरी से पहुंचेगा। इसके यहां 18-19 मई तक पहुंचने की संभावना है। ऐसा इसलिए क्योंकि बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में मानसूनी हवा देर से उठेंगी।

 

छह राज्यों में सूखे की संभावना
स्काईमेट ने मध्य भारत में सबसे कम 91 प्रतिशत बारिश का अनुमान लगाया है। पूर्वोत्तर में 92 प्रतिशत दक्षिण में 95 और पश्चिमोत्तर में 96 फीसदी बारिश हो सकती है। इस तरह देश के कई राज्य जैसे कि मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ में सूखा पड़ सकता है।

 

अलनीनो का असर
समुद्री हवा का रुख बदल जाता है। बारिश वाले क्षेत्रों में बारिश नहीं होती, इसके उलट जिन इलाकों में बारिश नहीं होती है, वहां मूसलाधार बारिश होती है।

 

नई सरकार के लिए होगी मुश्किल
कमजोर मानसून के होने से नई सरकार के लिए भी काफी मुश्किल हो जाएगी। महंगाई को काबू में रखने के लिए सरकार को ज्यादा रियायतें देनी होगी। इसके अलावा रिजर्व बैंक भी अपने रेपो रेट को बढ़ा सकता है, जिससे लोन के ब्याज पर असर पड़ेगा।

 

अर्थव्यवस्था से जुड़े मानसून के तार
मानसून के तार सीधे देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं। किसानों से लेकर के सरकार के बजट पर मानसून अपना प्रभाव दिखाता है। अगर मानसून कमजोर रहता है तो फि र खाद्य उत्पादन कम होगा, जिससे किसानों की दशा और खराब होगी। वहीं इससे महंगाई भी बढ़ेगी, जिसका असर आम लोगों पर पड़ेगा। अनाज, फ ल-सब्जियों व अन्य खाने-पीने का उत्पादन कम होने से बाजार में इनकी कमी हो जाएगी, जिससे कीमतों पर भी असर पड़ेगा।


- स्काइमेट के मानसूनी आंकड़ों पर एक नजर
- अत्यधिक बारिश की संभावना शून्य है।
- सामान्य से अधिक बारिश की संभावना भी शून्य है।
- 30 प्रतिशत संभावना सामान्य बारिश की है ।
- 55 प्रतिशत संभावना सामान्य से कम बारिश की है ।
- 15 प्रतिशत संभावना सूखे की है।

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