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JAISALMER NEWS- कभी बुझाता था सबकी प्यास, अब खुद की सांसत में जान!

-ऐतिहासिक गड़ीसर सरोवर के संरक्ष् ाण को गंभीर नहीं जिम्मेदार
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-जर्जर बंगलियों की नहीं ली जा रही सुध
जैसलमेर. जैसलमेर में आज भी वह पीढ़ी मौजूद है, जिसने ऐतिहासिक गड़ीसर सरोवर का पानी पीकर जीवन जीया है लेकिन बदले हालात में यह कलात्मक तालाब स्वयं की सुरक्षा व संवद्र्धन की गुहार लगाता प्रतीत होता है। सैकड़ों साल पुराने इस तालाब की सुंदरता को निहारने आज भी सालाना लाखों देशी-विदेशी सैलानी जुटते हैं और इसकी कलात्मकता के कायल होते हैं। गड़ीसर में पानी के बीचोबीच और किनारे बनी हुई प्राचीन बंगलियों व झरोखों की जर्जरावस्था को सुधारने की दिशा में काम नहीं हो पा रहा तो पानी आवक के रास्ते में होने वाले अतिक्रमणों की तरफ भी किसी का ध्यान नहीं जा रहा।

फैक्ट फाइल -
-1367 में महारावल गड़सी सिंह ने बनवाया यह सरोवर
-’70 के दशक तक पेयजल का था प्रमुख स्रोत
-05 लाख से ज्यादा सैलानी आते हैं प्रतिवर्ष