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10 एकड़ जमीन और 15 कमरों की व्यवस्था हो तो जल्द खोली जा सकती है नई स्कूल

- शहर के आसपास चिन्हित करनी होगी जमीन- नगरपरिषद और यूआइटी के पास हैं लैंड बैंक

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10 एकड़ जमीन और 15 कमरों की व्यवस्था हो तो जल्द खोली जा सकती है नई स्कूल

10 एकड़ जमीन और 15 कमरों की व्यवस्था हो तो जल्द खोली जा सकती है नई स्कूल

जैसलमेर. जैसलमेर शहर में नए केंद्रीय विद्यालय (केवी) को खोले जाने की दिशा में जिम्मेदार चाहें तो बहुत तेजी से कदम उठाए जा सकते हैं। जानकारी के अनुसार नए केवी के लिए 10 एकड़ जमीन और कम से कम 15 कमरों की व्यवस्था फौरी तौर पर कर ली जाए तथा कायदे से राज्य सरकार के माध्यम से केंद्रीय विद्यालय संगठन को प्रस्ताव भिजवाया जाए तो उन्हें जैसलमेर को नए केवी की सौगात देने में ज्यादा परेशानी पेश नहीं आएगी। यह काम राजनीतिक क्षेत्र के लोगों तथा प्रशासन को सम्मिलित रूप से करना होगा। सीमावर्ती जिले के भविष्य को आकार देने के लिए कांग्रेस और भाजपा को कम से कम इस मसले पर एकजुटता का परिचय देना होगा। जैसलमेर शहर में यह जमीन ऐसे इलाके में होनी चाहिए जो सडक़ मार्ग से लगता हुआ हो। इस तरह की जमीनों की उपलब्धता जैसलमेर नगरपरिषद और नगर विकास न्यास जैसलमेर के पास निश्चित रूप से होगी। न्यास के पास तो जैसलमेर शहर के बाहरी हिस्सों के अलावा मुख्यालय से सटे हुए पंचायत क्षेत्रों की जमीनें भी हैं। गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेज के लिए न्यास की तरफ से ही पहले 50 और उसके बाद कुल 150 बीघा जमीन नि:शुल्क उपलब्ध करवाई गई थी। यह जमीन रामगढ़ मार्ग पर शहर में ही है। केंद्रीय विद्यालय के लिए तो इससे बहुत कम लगभग 16 बीघा जमीन की जरूरत होगी।
इस तरह से बन सकती है बात
क्षेत्रीय सांसद और केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने जैसलमेर में नए केंद्रीय विद्यालय खोलने की सिफारिश पिछले महीनों में की गई थी। जानकारी के अनुसार उन्होंने इस संबंध में जिला कलक्टर को पत्र लिखा। जिला प्रशासन उनके पत्र को नत्थी करते हुए राज्य के शिक्षा विभाग को अपनी तरफ से जैसलमेर शहर में केवी की मांग को भिजवा सकता है। साथ ही प्रशासन जमीन का चिन्हीकरण भी कर सकता है। लेकिन नए नॉम्र्स के अनुसार राज्य सरकार की तरफ से ही केंद्र को जैसलमेर के नया केवी खोलने का प्रस्ताव भेजा सकता है। लिहाजा, क्षेत्रीय सांसद को इस मामले में केवल जैसलमेर प्रशासन तक ही सीमित रहने की बजाए राजस्थान शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों और राज्य के शिक्षा मंत्री से सम्पर्क अवश्य करना होगा। साथ ही यह जिम्मेदारी प्रदेश में सत्तासीन कांग्रेस के जैसलमेर जिले के जनप्रतिनिधियों की भी प्रमुख रूप से है। इसमें पोकरण विधायक शाले मोहम्मद तो वर्तमान में प्रदेश सरकार के केबिनेट मंत्री भी हैं। उनके साथ जैसलमेर विधायक रूपाराम धनदे को पहल करने की जरूरत है। यही कवायद जिला कांग्रेस संगठन और नगरपरिषद के सभापति हरिवल्लभ कल्ला समेत सत्ताधारी दल के अन्य प्रभावी नेता जयपुर तक करें तो जैसलमेर शहरवासियों को नया केंद्रीय विद्यालय मिल सकता है।
मिलकर करेंगे काम तो मिलेगा सबको श्रेय
राजनीति में किसी भी कार्य या उपलब्धि का श्रेय लेने की होड़ दलों के बीच स्वाभाविक रूप से रहती है। वहीं कुछ कार्य ऐसे होते हैं जो सभी दलों को मिलकर करने पड़ते हैं। नए केंद्रीय विद्यालय की स्थापना का कार्य भी कुछ इसी तरह का है। चूंकि इस समय केंद्र और राज्य में क्रमश: भाजपा व कांग्रेस की सरकार है। ऐसे में दोनों दलों को राजनीतिक दूरियों को पाट कर कम से कम इस मोर्चे पर साथ आकर काम करने की दरकार है। इसके अभाव में यह मांग विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की बेबसी के तौर पर ही उठ कर रह जाएगी।

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