
सीमावर्ती जैसलमेर जिले में पश्चिमी विक्षोभ के चलते करीब 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार वाले अंधड़ और बारिश से सरकारी व निजी स्तर पर लोगों का खासा नुकसान हुआ है। गत गुरुवार शाम से देर रात तक मौसम तंत्र में आए इस बदलाव के कारण सबसे ज्यादा नुकसान विद्युत तंत्र को हुआ है। जिले के कम से कम 125 गांवों में अंधेरा छा गया है और व्यवस्था को पुन: पटरी पर आने में दो दिन या उससे अधिक समय लगेगा। इसी तरह से जैसलमेर शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में ऊंचे-ऊंचे पेड़ तेज हवाओं के प्रहार को झेल नहीं पाए और धराशायी हो गए। इससे आवागमन में बाधा आई। शहर स्थित अमर शहीद सागरमल गोपा राउमावि की चारदीवारी का एक हिस्सा बड़े पेड़ के गिरने से जमींदोज हो गई है। कई घरों, प्रतिष्ठानों व अन्य भवनों में एयरकंडीशनर की बाहरी यूनिट गिर गई। सडक़ किनारे लगे अनेक हॉर्डिंग्स व बैनर्स व दुकानों आदि के साइन बोड्र्स को नुकसान पहुंचा। साथ ही कहीं-कहीं पर पत्थर गिरने की घटनाएं भी सामने आई हैं।
तेज अंधड़ ने जिले के विद्युत तंत्र को व्यापक स्तर पर नुकसान पहुंचाया है। डिस्कॉम के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि 33 केवी के 27 पोल्स, 132 केवी लाइन के मोहनगढ़ क्षेत्र में 4 टावर, 11 केवी के 550 से ज्यादा पोल्स धराशायी हो गए। ऐसे ही एक जगह पर पावर ट्रांसफार्मर जल गया। 10 अन्य ट्रांसफार्मर्स को नुकसान पहुंचा है। डिस्कॉम ने आंकलन किया है कि इस सबसे विभाग को कम से कम एक करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। 125 गांवों की बिजली गुल होने की बात सामने आई है। सभी ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत व्यवस्था पुन: सुचारू करने में कम से कम दो दिन या उससे अधिक का समय लगने वाला है। डिस्कॉम के अधीक्षण अभियंता बीआर चौधरी ने बताया कि व्यवस्था को सुचारू बनाने और फॉल्ट दूर करने में विभागीय कार्मिक और एफआरटी की टीमें युद्धस्तर पर काम कर रही हैं। जितना जल्दी संभव होगा, विद्युत आपूर्ति व्यवस्था सुचारू की जाएगी।
गुरुवार को शाम से लेकर देर रात तक बारिश व तेज अंधड़ के चलते स्वर्णनगरी की सडक़ें कई जगह से उधड़ गई और उन गड्ढ़े पड़ गए हैं। इसके अलावा मिट्टी के साथ अन्य कूड़ा करकट उड़ कर सडक़ों व गलियों में फैल गया। साफ-सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई है। शहर में कई जगहों पर बरसाती पानी जमा हो गया है। पेड़ों की टहनियों के टूटने से भी जगह-जगह आवाजाही में असुविधा हुई। स्थानीय बाशिंदों के साथ पशुधन को मौसम में आए यकायक बदलाव ने खूब परेशान किया। तेज मेघ गर्जन के साथ बारिश के समय गोवंश में घबराहट देखी गई। उन्होंने जहां जगह मिली, वहां पनाह ली।
Published on:
02 May 2025 11:30 pm

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