
सुहागिन औरतों की ओर से मनाया जाने वाला धींगा गवर पर्व शनिवार को कस्बे में महिलाओं ने हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस मौके पर महिलाओं ने परंपराओं के अनुसार पुत्र प्राप्ति व पति की दीर्घायु होने की कामना, परिवार में खुशी, अमन चैन व सुख समृद्धि के लिए गवर-ईसर की पूजा-अर्चना की व दिनभर व्रत रखकर धींगा गवर की कथा के बाद प्रसाद ग्रहण किया। कस्बे में कई जगहों पर सुहागिनों ने एक समूह में बैठकर धींगा माता की पूजा-अर्चना की व छप्पन भोग के साथ प्रत्येक सुहागिन की ओर से एक-एक रोटे का प्रसाद चढ़ाकर उसका भोग लगाया। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन हर घर में धींगा गवर की स्थापना कर ज्वारे बोए जाते है और वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया को इसका उत्थापन कर पूजा-अर्चना की जाती है। शनिवार को धींगा गवर की 15 दिन की पूजा के बाद 16वें दिन महिलाओं ने रोटे चढ़ाकर पूजा की और उत्थापन किया व अमर सुहाग की कामना की।
वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया के मौके पर कस्बे में महिलाओं ने आस माता का व्रत रखकर पूजा-अर्चना की। इस मौके पर महिलाओं ने जगह-जगह समूह में बैठकर आस माता की कथा का श्रवण किया और फल व रोटे का प्रसाद चढ़ाकर सुख, समृद्धि एवं पति के स्वास्थ्य व दीर्घायु होने के लिए कामना की। रात्रि में चंद्रमा के दर्शनों के पश्चात् अपना व्रत खोला।
Updated on:
27 Apr 2024 07:44 pm
Published on:
27 Apr 2024 07:43 pm

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