चार माह से टिड्डियों का प्रकोप जारी, खड़ी फसलों को पहुंचा रही नुकसान

चार माह से टिड्डियों का प्रकोप जारी, खड़ी फसलों को पहुंचा रही नुकसान
चार माह से टिड्डियों का प्रकोप जारी, खड़ी फसलों को पहुंचा रही नुकसान

Deepak Vyas | Updated: 20 Sep 2019, 08:00:05 PM (IST) Jaisalmer, Jaisalmer, Rajasthan, India

पोकरण. क्षेत्र में चार माह से चल रहा टिड्डियों का प्रकोप कम नहीं हो रहा है। लगातार नए दल यहां पहुंच रहे है। गौरतलब है कि क्षेत्र में चार माह से टिड्डियों का प्रकोप चल रहा है। गत कुछ दिनों से टिड्डियों की तादाद करोड़ों में हो गई है। जगह-जगह टिड्डियां डेरा डाले बैठी है।

पोकरण. क्षेत्र में चार माह से चल रहा टिड्डियों का प्रकोप कम नहीं हो रहा है। लगातार नए दल यहां पहुंच रहे है। गौरतलब है कि क्षेत्र में चार माह से टिड्डियों का प्रकोप चल रहा है। गत कुछ दिनों से टिड्डियों की तादाद करोड़ों में हो गई है। जगह-जगह टिड्डियां डेरा डाले बैठी है। ये टिड्डियों खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा रही है। जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है। विशेष रूप से राजमथाई, महेशों की ढाणी, केलावा, सनावड़ा, रामदेवरा क्षेत्र के विभिन्न गांवों व ढाणियों में टिड्डियों के दल डेरा जमाए बैठे है। शुक्रवार को ओला, बोनाड़ा, राजगढ़, रामपुरिया, लूणाकल्लां, भीखोड़ाई, सऊओ की ढाणी क्षेत्र में नए टिड्डी दल पहुंचे। इस वर्ष देरी से हुई बारिश के बाद बुआई की गई खरीफ की फसलें टिड्डी दल चौपट कर रहे है। जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। टिड्डी नियंत्रण दल की ओर से भी अब तक कई क्षेत्रों में न तो अपनी गाडिय़ां भेजी गई है, न ही कीटनाशक का छिड़काव कर टिड्डी दल पर नियंत्रण के प्रयास किए जा रहे है।
सिंचित क्षेत्र व आबादी में नहीं कर सकेंगे छिड़काव
कृषि विभाग के अनुसार क्षेत्र में कहीं पर भी टिड्डी आती है, तो उसकी सूचना टिड्डी नियंत्रण कक्ष में दी जा सकेगी। विभाग की ओर से पड़त, ओरण, गोचर व असिंचित क्षेत्रों में ही कीटनाशक का छिड़काव किया जाता है। यह कीटनाशक उच्च स्तर का खतरनाक होने के कारण सिंचित क्षेत्र, खेत व नलकूपों पर छिड़काव नहीं किया जाता है। छिड़काव से किसी व्यक्ति या पशु के बीमार होने की आशंका बनी रहती है। सहायक कृषि अधिकारी मदनसिंह चंपावत ने बताया कि किसानों को छिड़काव के लिए कीटनाशक दवाइयां ग्राम सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से 50 प्रतिशत कम दर पर दी जा रही है। किसान उसे खरीदकर अपने खेतों में कृषि विभाग के निर्धारित मापदण्डों के अनुसार पानी के घोल में मिलाकर छिड़काव कर सकते है। उन्होंने इसके लिए सरपंचों, वार्डपंचों व ग्रामीणों से हरसंभव सहयोग करने का आह्वान किया है।

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