नए एक्ट में निजी कंपनी को ज्यादा स्वतंत्रता, पहले किसानों को थी स्वतंत्रता

मंडी अधिनियम में संशोधन व नए मॉडल एक्ट का मंडी समिति ने किया विरोध, काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया

By: kashiram jatav

Published: 28 May 2020, 11:34 PM IST

झाबुआ. कृषि उपज मंडी समिति झाबुआ के समस्त कर्मचारी अधिकारियों ने संयुक्त मोर्चा द्वारा मंडी अधिनियम के संदर्भ में संशोधन के लिए राज्य शासन व मंडी बोर्ड से निवेदन किया था, किंतु उक्त संबंध में आज तक किसी प्रकार की प्रक्रिया से मोर्चा को अवगत नहीं कराया। गुरुवार को मंडी अधिनियम 1972 में संशोधन एवं नवीन मॉडल एक्ट के विरोध में काली पट्टी बांधकर झाबुआ मंडी प्रांगण में विरोध प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन में मंडी सचिव केके दिनकर, मंडी कर्मचारी लक्ष्मण सिंह चौहान, नब्बू सिंह मेड़ा, प्रेम सिंह अमलियार, मुकेश डामोर व समस्त मंडी कर्मचारी उपस्थित थे। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 में कृषकों को दलालों आड़तियों के शोषण से मुक्त कराने के कड़े प्रावधान के साथ बनाया गया था। इसका उद्देश्य किसानों के लिए उनकी कृषि का उपज उचित मूल्य क्रेता व्यापारियों द्वारा खुली प्रतिस्पर्धात्मक उचित मूल्य तय होता था। खुले में नीलामी कर किसानों की उपज का सही मूल्य तय होता था। जो मंडी प्रांगण में मंडी अधिकारियों की निगरानी और नियंत्रण में किसान के अनाज का सही तौल होता था और कृषि तोल के उपरांत तुरंत भुगतान भी किया जाता था। इस अधिनियम के तहत किसान को अपनी उपज बेचने की पूर्ण स्वतंत्रता थी। व्यापारी एक ही मंडी प्लेटफ ॉर्म पर अनाज क्रय करने की अनुमति प्राप्त थी। मॉडल एक्ट 2020 लागू होने से मंडी कर्मचारियों ने इसका विरोध किया है।
एक्ट में विभिन्न जिंसों के विक्रय के लिए कई बड़े व्यापारी निजी कंपनी के पास अलग-अलग स्थानों पर किसानों को जाना पड़ेगा। इस मंडी एक्ट में बड़े व्यापारी, निजी कंपनी को स्वतंत्रता दी गई है। जबकि पहले किसानों को पूर्ण स्वतंत्रता थी। मॉडल एक्ट 2020 के तहत मंडी मंडी ई प्लेटफ ॉर्म तथा सीधे तौर से कृषि उपज क्रय करने की व्यवस्था की गई है। इसमें मंडी प्रशासन का कोई हस्तक्षेप नहीं रहेगा ना ही पर ना ही वहां पर जाकर पर मंडी का कर्मचारी कोई जांच कर सकेगा।

निजी मंडी में किसानों को उपज का उचित दाम मिल पाएगा
बड़े व्यापारियों एवं निजी कंपनी द्वारा निजी मंडी चालू करने के बाद किसानों को उनकी उपज का उचित दाम मिल पाएगा , इसकी क्या गारंटी है। क्योंकि वर्तमान में कृषि उपज मंडी समिति में जो किसानों की उपज की नीलामी होती है। वहां पर भी कई व्यापारी द्वारा कभी तौल में कम कर दे जाता है तो कभी उचित मूल्य नहीं दिया जाता। इसको लेकर कई बार विवाद भी हुए। जब कृषि उपज मंडी समिति में इस तरह के हालात बन सकते हैं तो प्राइवेट मंडी में किसानों की उपज का दाम सही मिलेगा इसकी क्या गारंटी है।

बड़े व्यापारी निजी मंडी खोलेंगे तो फुटकर व्यापारी कहां जाएंगे
मॉडल एक्ट बड़े व्यापारियों एवं निजी कंपनी द्वारा प्राइवेट मंडिया चालू करने की अनुमति दी है। व्यापारियों को लाइसेंस दिया जाएगा। इससे वे किसानों से निजी मंडी से खरीदी कर पाएंगे, किसानों बड़े व्यापारी द्वारा बनाए अलग-अलग स्थानों पर अपनी उपज को बेचने जाना पड़ेगा। वहीं जब बड़े व्यापारी एवं निजी कंपनी को स्वतंत्रता प्रशासन द्वारा दे दी गई तो इसमें जो फुटकर व्यापारी हैं उसका क्या होगा। क्योंकि इन निजी कंपनियों में मंडी प्रशासन किसी तरह का कोई हस्तक्षेप पर पाएगा इससे क्या गारंटी की वह निजी कंपनियों बड़े व्यापारी किसानों की उपज का सही दाम और सही तोल उपलब्ध करवाएंगे।

प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं रहेगा
&शासन द्वारा जो मंडी अधिनियम में संशोधन किया है। उसका आज हमने विरोध किया है। इस एक्ट में बड़े व्यापारियों निजी मंडी खोलने के छूट दी है। उस व्यापारी पर मंडी प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं रहेगा। आगे जो हमारा संघ इसका निर्णय लेंगे उस तरीके काम करेंगे।
-केके दिनकर, झाबुआ मंडी सचिव

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