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सरकारी विभागों के निजीकरण का विरोध, देशव्यापी आंदोलन करेगा सर्व कर्मचारी संघ

बिजली निजीकरण के संशोधित बिल के खिलाफ 1 जून को विद्युत कर्मचारियों एवं इंजीनियर के आयोजित काला दिवस का करेंगे समर्थन

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सरकारी विभागों के निजीकरण का विरोध, देशव्यापी आंदोलन करेगा सर्व कर्मचारी संघ

सरकारी विभागों के निजीकरण का विरोध, देशव्यापी आंदोलन करेगा सर्व कर्मचारी संघ

जींद/चंडीगढ़. हरियाणा में कर्मचारियों के एक वर्ग की अगुवाई कर रहे सर्व कर्मचारी संघ ने कोरोना की आड़ में सरकारी विभागों का निजीकरण करने, ठेका कर्मचारियों को नौकरी से निकालने, श्रम कानूनों को खत्म करने और कर्मियों व पेंशनरों के वेतन भत्तों में कटौती करने का आरोप लगाते हुए 4 जून को प्रदेशभर में प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है।

यह निर्णय प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा की अध्यक्षता में मंगलवार को वीडियो कान्फ्रेंसिंग से आयोजित राज्य कार्यकारिणी की मीटिंग में लिया गया। बैठक में स्वास्थ्य विभाग में ठेके पर लगे करीब दस हजार सपोर्टिंग स्टाफ को नौकरी से निकालने की प्रक्रिया शुरू करने, साल 2015 में 1035 टीजीटी (अंग्रेजी) सहित 1538 पदों की शुरू हुआ भर्ती प्रक्रिया के परिणाम घोषित करने की बजाय प्रक्रिया को ही रद्द करने के किए जा रहे प्रयासों और कमजोर पैरवी के कारण सुप्रीम कोर्ट में केस हार चुके 1983 पीटीआई को विधाई शक्तियों का प्रयोग करते सेवा सुरक्षा प्रदान करने की बजाय दोबारा भर्ती प्रक्रिया शुरू करने पर कड़ी नाराजगी जताई गई।

एलटीसी के भुगतान की उठाई आवाज

राज्य कार्यकारिणी में चालू साल में ही रिटायर होने वाले कर्मचारियों को भी एलटीसी का भुगतान न करने की घोर निन्दा करते हुए रिटायर हो रहे कर्मियों को एलटीसी का भुगतान करने की मांग की गई। मीटिंग में कोरोना महामारी के बीच जेएनयू में पीएचडी कर रही सोशल एक्टिविस्ट नताशा नरवाल व दिव्यांगना को झूठे मुकदमों में गिरफ्तार करने की निंदा की गई और उन्हें रिहा करने की मांग की। राज्य कार्यकारिणी में किसानों व घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के खिलाफ बिजली निजीकरण के संशोधित बिल के खिलाफ 1 जून को बिजली कर्मचारियों एवं इंजीनियर द्वारा आयोजित काला दिवस का भी पुरजोर समर्थन करने का फैसला लिया गया।

सर्व सम्मति से पारित किए गए एक प्रस्ताव में लाकडाउन और इससे पहले में नौकरी से निकाले गए सभी ठेका कर्मचारियों को वापस सेवा में लेने की मांग की है।

कर्मचारी हितों में यह उठाएंगे मांग

4 जून को होने वाले प्रदर्शनों में विनिवेश के नाम पर सरकारी विभागों का निजीकरण करने के निर्णय को वापस लिया लेने, महगांई भत्ते पर डेढ साल तक बढ़ोतरी व एलटीसी पर एक साल तक लगाई गई रोक हटाने, पुरानी पेंशन योजना को बहाल करो और जनवरी, 2004 के बाद सेवा में आए कर्मियों को पुरानी पेंशन योजना के दायरे में लाने, नई भर्ती पर एक साल तक लगाई गई रोक को हटाओं और 2015 में शुरू की गई 1538 पदों की भर्ती प्रक्रिया को पूरा करते हुए ज्वाइनिंग करवाने, श्रम कानूनों में पूंजीपतियों के हकों में किए जा रहे संशोधनों पर रोक लगाने, कोरोना महामारी से अगली कतारों में खड़े होकर लडऩे वाले कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण प्रदान करों और सभी को 50 लाख एक्स ग्रेसिया राशि योजना में शामिल करने और ठेका प्रथा समाप्त कर ठेका कर्मियों को सीधा विभागों के पे- रोल पर किया जाएं और उन्हें सेवा सुरक्षा प्रदान करने आदि मांगों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।


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