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डिजिटल अरेस्ट में बड़ी कार्रवाई : 75 लाख रुपए खाते में जमा कराने वाला गिरफ्तार

- अहमदाबाद के खाता धारक को बदले में मिले थे 1.50 लाख रुपए कमीशन, अलग-अलग खाताें में जमा 47.34 लाख रुपए फ्रीज

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Digital arrest banar

बनाड़ थाना पुलिस की गिरफ्त में आरोपी

जोधपुर.

बनाड़ थाना पुलिस ने प्रभात नगर में सेवानिवृत्त कर्मचारी को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने की धमकियां देकर डिजिटल अरेस्ट कर 1.84 करोड़ रुपए ऐंठने के मामले में गुजरात के अहमदाबाद से बैंक के एक खाता धारक को गिरफ्तार किया। उसके खाते में 75 लाख रुपए जमा कराए गए थे और बदले में उसे 1.50 लाख रुपए कमीशन दिया गया था। पुलिस ने अलग-अलग खाताें में जमा 47.34 लाख रुपए फ्रीज करवाए हैं।

थानाधिकारी प्रेमदान रतनू ने बताया कि प्रकरण में डिजिटल अरेस्ट कर 11 चेक से 10 बैंक खातों में 1,84,50,000 रुपए जमा करवाए गए थे। खाता नम्बर की जांच के आधार पर कुछ संदिग्धों की पहचान की गई। इनको पकड़ने के लिए एसआइराजूराम की अगुवाई में कांस्टेबल प्रकाश चौधरी व राजेन्द्र की टीम अहमदाबाद भेजी गई, जहां साइबर सैल के एएसआइ राकेशसिंह व जितेन्द्रसिंह की मदद से तलाश कर अहमदाबाद निवासी पटेल सागर उर्फ भरत कुमार 35 पुत्र भरतलाल को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में ठगी के 75 लाख रुपए खाते में जमा होना कबूला। इस पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया।कोर्ट में पेश करने पर उसे रिमाण्ड पर भेजा गया है। आरोपी अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह से जुड़ा हुआ है और उससे अन्य बदमाशों के संबंध में पूछताछ की जा रही है।

1.50 लाख कमीशन देकर, 73.50 लाख दूसरा ले गया

पुलिस का कहना है कि डिजिटल अरेस्ट से 1.84 करोड़ 50 हजार रुपए दस खातों में जमा कराए गए थे। 75 लाख रुपए पटेल सागर के अहमदाबाद में बैंक खाते में जमा कराए गए थे। जो उसने चेक से निकाल लिए थे। बदले में उसे 1.50 लाख रुपए कमीशन दिया गया था। शेष 73.50 लाख रुपए एक अन्य बदमाश लेकर चला गया था।जिसके संबंध में जांच की जा रही है।

गिरफ्तारी कर डर बताकर वसूले थे 1.84 करोड़ रुपए

प्रभात नगर निवासी नरेश कुमार बैरवा बीपीसीएल महारत्न कम्पनी से सितम्बर 2020 में वीआरएस ले चुके हैं। गत 25 नवम्बर को अनजान व्यक्ति ने कॉल कर टेलीकॉम अथॉरिटी कम्पनी का कर्मचारी बताकर बात की थी। आधार कार्ड से नम्बर जारी कर ब्लैकमेलिंग की शिकायत दर्ज होना बताया। फिर उसने मुम्बई की साइबर क्राइम ब्रांच से जोड़कर बात कराई थी। मनी लॉन्ड्रिंग में संदिग्ध होना बताया गया था। उसे गिरफ्तारी के साथ ही जान का खतरा होने का डर भी बताया गया था। इससे बचने के लिए बैंक खाते में जमा राशि की जांच करने और दो-तीन दिन में वापस लौटाने का भरोसा दिलाया गया था। इस तरह डिजीटल अरेस्ट होने पर आरोपियों ने 27, 28 व 29 नवम्बर को 11 चेक से 10 खाते में ट्रांसफर करवा लिए थे।