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Rajasthan News: रेगिस्तान में जमकर उग रहे आम, जनता ने पानी का मोल पहचाना, घर-घर लगाए पेड़

Rajasthan News: बहन-बेटियों व रिश्तेदारों के घर भी भेजते हैं पके व कच्चे आम

जोधपुरMay 04, 2024 / 09:53 am

Rakesh Mishra

जितेन्द्र सिंह राजपुरोहित
रेगिस्तानी इलाके में आम के पेड़…। सुनने में भले ही यह अजीब लगता हो, लेकिन यह सच है। जोधपुर जिले के भोपालगढ़ क्षेत्र के रतकुड़िया गांव में घर-घर में आम के पेड़ खड़े हैं। इस समय ये पेड़ फलों से लदे हुए हैं। हालांकि अभी आम कच्चे हैं, लेकिन फल पकने के बाद इस गांव में प्रवेश करते ही आम की खूशबू आ ही जाती है। क्षेत्र के लोगों ने बरसों तक पेयजल संकट झेला है, इसलिए लोगों को पानी का मोल पता है। लोगों ने नहाने-धोने में व्यर्थ होने वाले पानी का सदुपयोग करने के लिए घर-घर पेड़-पौधे लगाने शुरू किए। अब गांव के कई घरों व ढाणियों में लोग घर में उगे पेड़ से तोडक़र ही आम खाते हैं। इस गांव में आम तो आम बात होकर रह गई है।

जैसे पकते हैं, वैसे खाते हैं

गांव में आम के पेड़ों पर लगने वाले फलों का सेवन तब करते है, जब वे पूरी तरह से पक जाते हैं। ग्रामीण कुछ कच्चे आम (कैरी) का उपयोग सब्जी व अचार बनाने में काम में ले लेते है। अपनी बहन-बेटियों व रिश्तेदारों के वहां भी कैरी व आम भेजते हैं। ग्रामीण आम को बेचते नहीं है।

नहरी पानी ने बदला नजारा

रतकुड़िया के निवासी व पूर्व केबिनेट मंत्री रामनारायण डूडी के प्रयासों से इस क्षेत्र में करीब 15 साल पहले माणकलाव-खांगटा पेयजल परियोजना से नहरी पानी पहुंचने के बाद नजारा ही बदल गया। डूडी के अनुसार बरसों से पेयजल संकट से जूझ रहे इस गांव के लोगों को पानी का मोल अच्छे से मालूम था। उन्होंने घर के सामने आम, अनार, नींबू, पपीता, सेब व चीकू के पौधे लगाए। ये पौधे बड़े होकर फल देने लगे। फिर इन फलदार पेड़ों एवं खासकर आम के पेड़ों को देखकर ग्रामीणों ने भी ऐसा करना शुरू किया। देखते ही देखते गांव के लगभग हर दूसरे घर में आम के पेड़ नजर आने लगे।

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