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Rajasthan News : कब मिलेगा राजस्थान की मिर्च-मैथी को जीआई टैग, किसानों की बदल सकती है किस्मत

locationजोधपुरPublished: Apr 03, 2024 11:36:25 am

Submitted by:

Rakesh Mishra

Rajasthan News : मारवाड़ मोटे अनाज के साथ मसालों का प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है। मारवाड़ की लाल मिर्च और पान मैथी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं, लेकिन अभी तक इन्हें भौगोलिक पहचान (जीआई टैग) नहीं मिला है।

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अमित दवे
Rajasthan News : मारवाड़ मोटे अनाज के साथ मसालों का प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है। मारवाड़ की लाल मिर्च और पान मैथी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं, लेकिन अभी तक इन्हें भौगोलिक पहचान (जीआई टैग) नहीं मिला है। देश में सबसे ज्यादा पान मैथी की पैदावार राजस्थान में होती है। अगर इन फसलों को भौगोलिक पहचान मिलती है तो इनके उत्पादन, विपणन और निर्यात में फायदा होगा। वहीं किसानों को इन फसलों का सही मूल्य दिलाने में भी मदद मिलेगी। गत वर्ष अगस्त में जोधपुरी बंधेज सहित प्रदेश की 5 कलाओं को जीआई टैग मिला है। अब तक प्रदेश में 21 उत्पादों, कलाओं को जीआई टैग मिल चुका है।
मथानिया की लाल मिर्च
मारवाड़ मथानिया की मिर्च विश्व स्तर पर पहचान बना चुकी है। अपने सुर्ख लाल रंग, स्वाद व गुणवत्ता की वजह से मारवाड़ में पैदा होने वाली मिर्ची की खास मांग रहती है। जोधपुर जिले में मथानिया वैरायटी की मिर्च जिले के पीपाड़, सोयला, मंडोर क्षेत्र में पैदा होती है।
नागौर की मैथी
देश में मैथी उत्पादन की दृष्टि से राजस्थान का प्रथम स्थान है। यहां की पान मैथी विश्व स्तर पर अपनी पहचान कायम कर चुकी है। निर्यात में भी मैथी की भरपूर मांग रहती है। नागौर पान मैथी का प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है। नागौरी मैथी की खुशबू, रंग व स्वाद अनोखा है।
प्रदेश के इन 21 उत्पादों को मिला जीआई टैग
बगरू हैंड ब्लॉक प्रिंट, ब्ल्यू पॉटरी जयपुर, ब्ल्यू पॉटरी जयपुर (रेनवाल), कठपुतली, कठपुतली (लोगो), कोटा डोरिया, कोटा डोरिया (लोगो), मोलेला क्ले वर्क, सांगानेरी हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग, थेवा आर्ट वर्क, मोलेला क्ले वर्क (लोगो), फुलकारी, पोकरण पॉटरी, बीकानेरी भुजिया, मकराना मार्बल, सोजत मेहंदी, पिछवाई कला नाथद्वारा, जोधपुरी बंधेज जोधपुर, कोफ्तगिरी उदयपुर, उस्ता कला बीकानेर व कशीदाकारी क्राफ्ट बीकानेर।
क्या है जीआई टैग
किसी वस्तु या उत्पाद की किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में हुई उत्पत्ति तथा उससे जुड़े गुणों को सूचित करने के लिए जीआई टैग दिया जाता है। यह उसी उत्पाद को दिया जाता है, जो विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में 10 वर्ष या इससे ज्यादा समय से निर्मित या उत्पादित किया जा रहा हो। जीआई टैग मिलने के बाद कोई भी अन्य निर्माता समान उत्पादों को बाजार में लाने के लिए नाम का दुरुपयोग नहीं कर सकता है। भारत में यह 15 सितंबर 2003 से लागू है।
हम पिछले करीब चार सालों से नागौरी पान मैथी व मथानिया की लाल मिर्च के इतिहास, केमिकल टेस्टिंग, वैरायटी आदि का अध्ययन कर रहे हैं, जो सभी मानकों पर खरी है। इन दोनों मसाला फसलों की बहुत डिमाण्ड भी है। इनको राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलनी चाहिए। राज्य सरकार से भी इसके लिए गंभीर प्रयास करने की मांग है।
- श्रीशैल कुल्लोली, असिस्टेंट डायरेक्टर, स्पाइस बोर्ड, जोधपुर
मारवाड़ में नागौर की पान मैथी और मथानिया की लाल मिर्च को भौगोलिक पहचान (जीआई) मिलती है, तो निश्चित ही इन फसलों के विस्तार करने, उत्पाद को वैश्विक स्तर पर बेचने में मदद मिलेगी।
- प्रो बीआर चौधरी, कुलपति, कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर

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