
कुम्हारों को उम्मीद, दीपावली पर्व पर इस बार भी दमकेगा दीया बाजार, इसलिए बना रहे तरह-तरह के मिट्टी के दीपक
कोरबा. दीपावली (Deepawali festival) के मौके पर दीयों का अलग ही महत्व है। ऐसी मान्यता है कि मिट्टी का दीपक जलाने से शौर्य और पराक्रम में वृद्धि होती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है, लेकिन महंगाई के चलते अब दीयों का चलन कम हो गया है। तेल की महंगाई ने लोगों का रुझान मोमबत्ती और बिजली की झालरों की ओर कर दिया है। इसके बाद भी शहर के कुम्हारों के चेहरे खिले हुए हैं। उनको पूरी उम्मीद है कि दीया बाजार इस बार भी दमकेगा।
सीतामणी क्षेत्र के कुम्हार दीये बनाने में जोर-शोर से जुट गए हैं। तैयार हो रहे दीयों को एक जगह संग्रहित किया जा रहा है। कुम्हारों के अनुमान के मुताबिक पिछले बार शहर में तीन से चार लाख दीयों की बिक्री हुई थी। इस वर्ष इससे ज्यादा बिक्री की उम्मीद है।
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अलग-अलग तरह के दीये किए जा रहे तैयार
इस बार कुंभकारों ने कई तरह के दीये तैयार किए हैं, जिनमें गुलाब फूल दीया, तीन पत्ती दीया, कमल दीया, स्वास्तिक दीये, स्टार दीया, ऊं आकार के दीये, गणेश-लक्ष्मी दीप शामिल हैं। पिछली बार की तुलना में दीयों की कीमत में 20 फीसदी तक इजाफा हुआ है। बारिश थमते ही कुम्हारों ने दीये तैयार करने में जोर-शोर से जुट गए हैं। ११ दिन बाद दीपोत्सव शुरू हो जाएगा।
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Updated on:
15 Oct 2019 01:37 pm
Published on:
15 Oct 2019 01:37 pm
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