
कोरबा से रेनुकोट व्हाया अंबिकापुर रेल लाईन खटाई में, चार साल पहले किया गया था सर्वे
केारबा. उर्जाधानी कोरबा को उत्तर प्रदेश के रेनुकोट से जोडऩे के लिए रेल मार्ग की परिकल्पना आज से चार वर्ष पहले शुरू हुई थी। वर्ष २०१४-१५ में कोरबा से रेनुकोट व्हाया अंबिकापुर की ३३१ किमी लंबी रेल लाईन बिछाने की योजना थी। फिलहाल यह योजना सर्वे तक ही सीमित है। इस महत्वपूर्ण परियोजना के विषय में रेलवे के अधिकारियों को भी वर्तमान में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। जबकि इस मार्ग की दुर्गम व रेल नेटवर्क से अछूता रहने के कारण इसे स्वीकृत किया गया था। रेलवे के विस्तार के मामले में जिला लंबे समय से उपेक्षाओं का दंश झेल रहा था।
नहीं है कोई रेल नेटवर्क
कोरबा से अंबिकापुर और इसी दिशा में रमानुजगंज से होते हुए झारखण्ड तक कोई रेल नेटवर्क नहीं है। जबकि इस दिशा में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या काफी ज्यादा है। फिर चाहे वह सस्तें दरों पर काम करने वाले मजदूर या फिर नौकरीपेशा सभी कोरबा से अंबिकापुर से होते हुए झारखण्ड, बिहार व यूपी तक का सफर तय करते हैं। दुर्भाग्यवश इस दिशा में कोई भी रेल नेटवर्क नहीं है। लोगों के पास सड़क मार्ग से सफर करने के अलावा और कोई भी विकल्प नहीं है। इसी मार्ग पर अंबिकार से गढ़वा तक की १७० किमी लंबी रेल लाईन का भी सर्वे किया गया था। जिसका हाल भी कोरबा-रेनुकोट जैसा ही है।
इतना राजस्व कोरबा से
वर्तमान म उर्जाधानी से औसतन ३४ रैक कोयले का डिस्पैच प्रतिदिन किया जा रहा है। पीक सीजन में यह औसत ४० से ४५ तक भी पहुंच जाता है। एक रैक में ५८ वैगन होते हैं। प्रत्येक वैगन में औसतन ८७ टन कोयला भरा जाता है। राज्य के बाहर कोयल से लदी प्रत्येक रैक के परिवहन के एवज में रेलवे को ३० लाख रूपए का भाड़ा एसईसीएल से प्राप्त होता है। जिसका अर्थ यह हुआ कि जिले में केवल कोयला लदान से ही रेलवे को हर दिन औसतन १० करोड़ २० लाख रूपए का राजस्व प्राप्त होता है।
Published on:
09 Nov 2018 09:41 pm
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