
कोटा . सोनोग्राफी सेंटर की लापरवाही से एक जन्मजात विकृत बालिका के जन्म का मामला सामने आया है। नवजात के दोनों हाथ नहीं है। जब परिजनों को बच्ची के हाथ नहीं होने की जानकारी मिली तो वह आक्रोशित हो गए और चम्बल गार्डन रोड स्थित सोनोग्राफी सेंटर पहुंचे और लापरवाही का आरोप लगाते हुए डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कहने लगे। इस दौरान वहां पहुंचे डॉक्टर ने उन्हें समझाबुझा कर मामला शांत करने का प्रयास किया। संचालक ने परिजनों को हर माह बच्ची के नाम कुछ राशि जमा कराने की बात कही तब जाकर परिजन राजी हो गए।
जानकार डॉक्टर ने बताया कि सरकार के नियमों में हर तीन माह या आवश्यक हो तो किसी भी माह में सोनोग्राफी कराई जा सकती है। गर्भ में बच्चे के विकृति का पता तीन माह बाद ही चल जाता है। कुछ मामलों में ये समय कम या ज्यादा हो सकता है। करीब साढ़े चार या पौने पांच माह बाद नियमानुसार गर्भपात नहीं कराया जा सकता। वहीं, परिजनों ने डॉक्टर पर जांच में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है।
सोनोग्राफी सेंटर संचालक डॉ. राजीव नारंग ने बताया कि हमारे पास 4-डी सोनोग्राफी मशीन नहीं है, जिस कारण ये हो गया है। हम जांच नहीं करते, लेकिन इनके बार-बार कहने पर जांच की गई है। सीएमएचओ डॉ. आरके लवानिया ने बताया कि जन्मजात विकृत बालिका ने जन्म लिया है तो इस मामले की जांच करेंगे।
Published on:
15 Feb 2018 12:16 pm
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