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दशहरा मेले में अधमरा रावण करा गया महाभारत, कार्यकमों को लेकर छिड़ रहा युद्ध, तय नहीं सिने संध्या

National Fair Dussehra: मेला समिति और निगम अधिकारियों के बीच विवाद की खाई
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कोटा

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Suraksha Rajora

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Updated: 11 Oct 2019, 10:43 AM IST

दशहरा मेले में अधमरा रावण करा गया महाभारत, कार्यकमों को लेकर छिड़ रहा युद्ध, तय नहीं सिने संध्या

दशहरा मेले में अधमरा रावण करा गया महाभारत, कार्यकमों को लेकर छिड़ रहा युद्ध, तय नहीं सिने संध्या

कोटा. दशहरा मेले में अधजले रावण दहन के बाद अब मेला समिति और निगम अधिकारियों के बीच विवाद की खाई बढ़ गई है। विवाद की स्थिति यह रही कि गुरुवार को मेला समिति की ओर से बुलाई गई बैठक में न तो आयुक्त गए और न मेला अधिकारी। सह मेला अधिकारी को बैठक के लिए अधिकृत कर दिया गया। उधर मेला समिति भी अब मेले को राजनीतिक रंग देने में जुटी हुई है। वहीं कांग्रेस पार्षद अब मेलाधिकारी के बचाव में मैदान में उतर गए हैं।


महापौर महेश विजय के नेतृत्व में बुधवार को मेला समिति ने जिला कलक्टर से भेंटकर मेला अधिकारी पर मनमानी करने तथा समिति के निर्णयों की पालना नहीं करने की शिकायत की थी। अधिकारियों और मेला समिति के बीच विवाद बढऩे का असर मेले के कार्यक्रम पर भी पडऩे लग गया है। दो दिन पहले मेले में बनाई जाने वाली यज्ञशाला को निरस्त कर दिया गया था।

गुरुवार को मेला समिति ने बॉडी बिल्डिंग कार्यक्रम को निरस्त करने का प्रस्ताव पारित कर दिया है। समिति सदस्यों ने कहा कि मेलाधिकारी ने समिति की बिना जानकारी के यह कार्यक्रम तय कर दिया है। इस कार्यक्रम के लिए पांच लाख का बजट भी मंजूर कर दिया गया है। मेला समिति के अध्यक्ष राममोहन मित्रा का कहना है कि बैठक में सदस्यों ने कार्यक्रम निरस्त करने का निर्णय लिया है। विवाद के कारण सिने संध्या का कार्यक्रम तय नहीं हुआ है। महापौर जिम्मेदारी से भाग रहे हैं।

प्रतिपक्ष नेता अनिल सुवालका ने कहा कि महापौर अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं और अपनी कमियां छिपाने के लिए मेलाधिकारी पर आरोप मढ़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मेले में पिछले एक माह में हुए हर टेंडर में महापौर अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने ओर उन्हें दिलवाने के लिए मेलाधिकारी एवं अन्य अधिकारियों पर अनावश्यक दबाव बना रहे हैं। टेंट की शर्त बदलने के लिए महापौर ने यू नोट क्यों लिखा था इसका जवाब दें।

रावण के पुतले के अधजला दहन के लिए महापौर, मेला समिति के अध्यक्ष और समिति के सदस्यों ने एक दिन भी पुतलों की स्थिति का जायजा लेने उचित नहीं समझा। महापौर सारा दोष अधिकारियों पर नहीं मढ़ सकते, वे निगम के मुखिया है वो भी बराबर के दोषी है।

अधिकारियों का असहयोगात्मक रवैया
महापौर महेश विजय ने कहा की दशहरा मेला निगम का मेला नहीं है, जनता का मेला है। इसके भव्य आयोजन की सामूहिक जिम्मेदारी है। मेले में हर कार्यक्रम सुव्यवस्थित और बेहतर रूप से आयोजित किए जाएं, इसके प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों के असहयोगात्मक रवैये के कारण ही कार्यक्रम निरस्त करने
पड़ रहे हैं।

मेले के लिए सात कार्यपालक मजिस्टे्रट लगाए
मेले में आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान 24 अक्टूबर तक कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला मजिस्ट्रेट ने 7 कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त किए हैं। आदेश के अनुसार निगम उपायुक्त कीर्ति राठौड़ को श्रीराम रंगमंच के वीआईपी गेट पर, निगम उपायुक्त राजपाल सिंह को वीआईपी गेट एन्ट्री के लिए, उपायुक्त ममता तिवारी को विजयश्री रंगमंच एवं वीआईपी ब्लॉक के लिए, कुल सचिव वद्र्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय शंभुदयाल मीणा को विजयश्री रंगमंच के सामने, उप सचिव नगर विकास न्यास अम्बालाल मीणा को रंगमंच के सामने ब्लॉक 3 व 4 के पीछे, उप निदेशक स्थानीय निकाय विभाग दीप्ति रामचन्द्र मीणा को रंगमंच के बाईं ओर तथा जिला रसद अधिकारी बालकृष्ण तिवारी को रंगमंच के दाईं ओर कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त किया है।


जांच शुरू नहीं
महापौर की ओर से रावण के पुतले के सिर का दहन नहीं होने तथा खामियों की जांच के लिए गठित कमेटी ने दूसरे दिन गुरुवार को जांच शुरू नहीं की है। शाम तक जांच में शामिल पार्षदों के पास जांच के आदेश भी नहीं पहुंचे हैं, जबकि सात दिन में जांच पूरी करनी है।