3 मई 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

राजस्थान का यह सरकारी विभाग जल संरक्षण की अनूठी नजीर पेश कर बचा रहा लाखों लीटर पानी

Water crisis, Water Harvesting, Rainwater harvesting: सिंचाई प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से हर वर्ष छत पर गिरने वाले बरसात के पानी को सहेज कर नजीर पेश कर रहा है।

3 min read
Google source verification

कोटा

image

Zuber Khan

Jul 21, 2019

Water Harvesting

राजस्थान का यह सरकारी विभाग जल संरक्षण की अनूठी नजीर पेश कर बचा रहा लाखों लीटर पानी

कोटा. एक तरफ जहां सरकार जल संरक्षण को लेकर जागरूकता कार्यक्रमों पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। पानी बचाओ( Water Save ) के नारे लगाए जाते हैं। इन सब के बाद भी शहर के अधिकांश कार्यालयों में बरसाती पानी बचाने को लेकर खास प्रबंध नहीं है। इससे लाखों लीटर जल व्यर्थ बह रहा है। ( millions liters water wasted Every )

Read More: बूंद-बूंद को तरस रहा राजस्थान और 2.50 करोड़ लीटर पानी रोज बर्बाद कर रहा कोटा, 6 लाख लोगों की प्यास बुझा सकता है यह पानी
अधिकतर सरकारी और गैर सरकारी महकमें जल संरक्षण को लेकर गंभीर नहीं हैं। वहीं दूसरी ओर शहर में दादाबाड़ी सीएडी रोड स्थित सिंचाई प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम ( water harvesting ) से हर वर्ष छत पर गिरने वाले बरसात के पानी को सहेज कर नजीर पेश कर रहा है। संस्थान न सिर्फ अमृत को एकत्रित कर रहा है, बल्कि गिरते भूजल स्तर को बढ़ाने की दिशा में भी सिस्टम के माध्यम से योगदान दे रहा है। ( Rainwater Harvesting )

Read More: चौंकाने वाला खुलासा: हर दिन भीलवाड़ा की प्यास बुझा दे, इतना पानी व्यर्थ बहा देता है कोटा

चार वर्ष पूर्व किया था सिस्टम स्थापित
संस्थान के संयुक्त निदेशक एन आर बामनिया ने बताया कि वर्ष 2015 में रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाया था। संस्थान के प्रशासनिक, छात्रावास व प्रशिक्षण केन्द्र तीनों भवनों में अलग-अलग सिस्टम स्थापित किए हैं। तीनों की छतों पर गिरने वाले बरसाती जल को शुद्ध कर संग्रहित किया जा रहा है। इसका फायदा यह है कि तीनों भवनों के पास तीन ट्यूबवेलोंं में पानी उपलब्ध है।

Read More: कोटा में रेगिस्तान जैसे हालात: 47 डिग्री टेम्प्रेचर में ढाई किमी पैदल चल हजारों लोग लाते हैं पीने का पानी

ऐसे मिली थी प्रेरणा
संयुक्त निदेशक बामनिया ने बताया कि जयपुर में एक सेमिनार के दौरान डॉ. पीसी जैन के वाटर हार्वेस्टिंग पर उल्लेखनीय कार्य के बारे में पता चला। उन्हें कोटा में एक सेमिनार आयोजित कर बुलाया। उनके व्याख्यान से प्रेरित होकर सिस्टम विकसित किया। उनकी बताई तकनीक से ही सिस्टम के माध्यम से पानी संग्रहित करते हैं। सिस्टम में फिल्टर से गुजरकर पानी छनकर ही भूतल में जाता है। गंदगी आने पर वाल्व के माध्यम से साफ कर लिया जाता है।

न के बराबर खर्च
बामनिया ने बताया कि सिस्टम पर महज 49 हजार रुपए खर्च आया। इसमें इतना पानी संग्रहित है कि हम चार वर्षों से लगातार ट्यूबवैल के जरिए पानी का उपयोग कर रहे हैं।

Read More: कोटा में हर दिन 2.50 लाख लीटर पानी गाडिय़ों की धुलाई पर होता खर्च, एक गांव पानी पी ले इतने में धुलता है घर-आंगन

यह जानना जरूरी
सिस्टम को स्थापित करने के लिए भूजल स्तर, वर्षा की मात्रा जमीन का क्षेत्र समेत विभिन्न बिंदुओं को देखा जाता है। इसकी अलग-अलग गाइड लाइन है। 300 वर्ग मीटर के भूखंड पर निर्माण करते हैं तो वहां वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित किया जाना जरूरी है। इसके अलावा नोटिफाइड जमीन पर प्रशासन की अनुमति लेकर ट्यूबवैल लगवाते हैं, वहां भी सिस्टम स्थापित किया जाना चाहिए।

बड़े मकानों के लिए जरूरी व उपयोगी है
मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना के तहत शहर में करीब 48 भवनों में रूफ टॉप रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम व्यवस्था की गई है। एक 300 वर्ग मीटर के भूखंड पर निर्माण के लिए स्वीकृति से पूर्व निगम में राशि जमा होती है, कोई व्यक्तिगत तौर पर बना लेता है तो यह राशि वापस लौटा दी जाती है, कुछ लोगों ने राशि वापस ली भी है।
प्रेमशंकर शर्मा, अधीक्षण अभियंता, नगर निगम

छत के पानी को संग्रहण, संचयन व पुनर्भरण करना काफी जरूरी व उपयोगी है। इससे भूजल स्तर बनाया रखा जा सकता है। हर विभाग व घर में मापदंडों के अनुसार सिस्टम विकसित हों।
डॉ. विनय भारद्वाज, वरिष्ठ भूजल वैज्ञानिक, जयपुर