
स्मार्ट रोबोट्स के दम पर शेयर मार्केट पर हमला है नई युद्ध नीति
आधुनिक विनाशकारी हथियारों में परमाणु बम, घातक वायरस और जानलेवा मशीनें दुश्मन के सफाए के नए साधन हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौड़ में इतिहास का सबसे घातक हथियार शामिल नहीं है। सालों से एक-दूसरे को युद्ध क्षेत्र में मात देने के लिए विकसित राष्ट्र अपने संसाधनों और वैज्ञानिक शोधों का उपयोग संहारक हथियार बनाने में कर रहे हैं। लेकिन युद्ध के जानकारों और तकनीक के दिग्गजों का मानना है कि सीखने की क्षमता से लैस कृत्रिम बुद्धिमत्ता वाले रोबोट्स इंसान के सबसे घातक हथियार हो सकते हैंं। वैज्ञानिकों का ऐसा सोचना गलत नहीं हैं। क्योंकि अब निवेशक भी इन मशीनों में ही पैसा लगाने को अक्लमंदी मान रहे हैं। यानि इन्वेस्टमेंट के लिहाज से इनके निर्माण के लिए अब पहले से ज्यादा पैसा जुटाया जा रहा है। वे दिन दूर नहीं जब ये रोबोट्स स्टॉक एक्सचेंज और अर्थ व्यवस्था को भी अपने मुताबिक नियंत्रित करने लगेंगे। बड़ी टेक कंपनियों के अलावा नामी अंतरराष्ट्रीय फर्म भी 'समझदार रोबोट्स' के निर्माण में धन लगाने को मुनाफे का सौदा मान रही हैं।
रोबोट बना रहे शेयर मार्केट रणनीति
आपको जानकर हैरानी होगी की अब स्मार्ट मशीनों के रूप में आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस से लैस रोबोट्स शेयर मार्किट की रणनीति भी बनाने लगे हैं। लिंक्स एसेट मैनेजमेंट ने एक ऐसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एल्गोरिद्म विकसित की है जो बाजार के जोखिमों, शेयर मार्केट के आंकड़ों और अपने प्रशिक्षण के दम पर ऐसी रणनीतियां तैयार करती है जो प्रतिद्वंद्वी को धूल चटा देती हैं। कंपनी के सीईओ एलन एलेक्स ने ब्लूमबर्ग से बातचीत में कहा कि यह हथियार बनाने की दौड़ में अगला चरण है। अब लड़ाई जमीन पर आमने-सामने नहीं बल्कि शेयर मार्केट के जरिए मशीनी बुद्धिमत्ता और इंसान के हुनर के बीच है।
ट्रेड वॉर को मिलेगी नई ऊंचाई
लगातार सीखने वाले ये रोबो ट्रेड एनालिस्ट आने वाले समय में क्वांट इन्वेस्टमेंट (बाजार के उतार-चढ़ाव का लेखा-जोखा रखने वाले बाजार विश्लेषक या क्वांटिटेटिव एनालिस्ट) को अगले स्तर पर ले जाएंगे। क्योंकि ये समझदार रोबोट बिना इंसानी मदद या मानव निर्देशों केसमय के साथ उपलब्ध आकंड़ों के आधार पर स्वत: ही अपने प्रदर्शन को लगातार बेहतर बनाने के लिए ही प्रोग्राम किए गए हैं। यह तकनीक-प्रेमी, डेटा-चालित क्वांट इन्वेस्टमेंट में इंसानों को भी चुनौती देने लगा है। तकनीक की उपलब्धता और सबसे आगे रहने की होड़ में आज यह रोबो ट्रेड एनालिस्ट सस्ते और सुलभ होते जा रहे हैं। आने वाले सालों में इनसे बाजार पर अपना नियंत्रण करने की कोशिश में ट्रेड वॉर और भी ज्यादा व्यापक स्तर पर शुरू होने की आशंका है।
अर्थव्यवस्था पर हमला है नया हथियार
चीन और अमरीका के बीच चल रहे ट्रेड वॉर ने एक बार फिर इस बात को साबित कर दिया है कि सामरिक शक्ति में आज ज्यादातर बड़े राष्ट्र एक-दूसरे के बराबर ही हैं। ऐसे में जमीनी लड़ाई के जरिए वे देश को युद्ध के भयावह नतीजों में नहीं डाल सकते। यही कारण है कि एक-दूसरे पर राजनीतिक और सामरिक दबदबा बनाए रखने के लिए अब बड़े राष्ट्रों ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए अर्थव्यवस्था पर चोट करने की नीति अपनाई है। छोटे राष्ट्र और विकसित देश जहां अभी इस लड़ाई में नहीं कूदे हैं वहीं रूस, अमरीका, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन जैसे देशों ने इस ओर अपनी चासलें चलने शुरू कर दी हैं। आने वाले सालों में युद्ध मैदान में नहीं घर के अंदर तकनीक के सहारे ही लड़े जाएंगे, जिसमें शह और मात का सालों तक अंदाजा लगा पाना संभव नहीं हो पाएगा। क्योंकि आर्थिक संकट भी शनै: शनै: सामने आते हैं।
Published on:
14 Feb 2021 08:33 pm
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