script हाईकोर्ट के वकील पर मुकदमा: एसएसजे परिसर के शिक्षकों से 72 लाख रुपये ठगी का आरोप | Case against High Court lawyer in Uttarakhand | Patrika News

हाईकोर्ट के वकील पर मुकदमा: एसएसजे परिसर के शिक्षकों से 72 लाख रुपये ठगी का आरोप

locationलखनऊPublished: Dec 28, 2023 03:33:15 pm

Submitted by:

Naveen Bhatt

पुलिस ने हाईकोर्ट के एक अधिवक्ता सहित उनकी साथी महिला पर धोखाधड़ी के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है। वकील पर कॉलेज के संविदा शिक्षकों को परमानेंट करने के नाम पर 72 लाख रुपये ठगी का आरोप है।

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एसएसजे कैंपस अल्मोड़ा
उत्तराखंड के अल्मोड़ा स्थित एसएसजे परिसर के 24 संविदा शिक्षकों से 72 लाख रुपये की ठगी का मामला पिछले एक साल से सुर्खियों में है। पुलिस के मुताबिक एसएसजे परिसर अल्मोड़ा में संविदा शिक्षकों ने तहरीर सौंपी है। कहना है कि वर्ष 2020 में एसएसजे विवि के अस्तित्व में आने के बाद अस्थाई शिक्षकों ने विनियमितीकरण की मांग की थी। मांग पूरी नहीं होने पर उन्होंने विधिक राय ली थी। तब एक शिक्षक की मुलाकात उच्च न्यायालय के अधिवक्ता महेंद्र सिंह की सहयोगी बताने वाली प्रतीक्षा मधुकर से हुई थी। प्रतीक्षा ने बताया कि महेंद्र उच्च न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता हैं।
कम लागत में काम करने का दिया था झांसा
आरोप है कि अधिवक्ता ने सभी अस्थाई शिक्षकों को आश्वासन दिया कि कम लागत में जल्द उन्हें परमानेंट करवा सकता है। झांसे में आए 24 शिक्षकों ने अधिवक्ता को 72 लाख रुपये दे दिए थे, लेकिन वह नियमित नहीं हो पाए।
चेक पर नहीं हुआ भुगतान
अस्थाई शिक्षकों ने आरोपियों को 72 लाख की रुपये दे दिए थे। काफी समय बीतने के बाद जब कोई कार्यवाही नहीं हुई तो शिक्षकों ने रुपये वापस लौटाने की मांग की। आरोपी ने उन्हें दस लाख रुपये का चेक दिया, लेकिन बैंक से भुगतान नहीं हुआ। कोतवाल अरुण कुमार के मुताबिक आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

शिक्षक पर ही लगा दिया आरोप
अधिवक्ता महेंद्र की सहायक प्रतीक्षा ने पिछले साल 23 सितंबर को एक शिक्षक पर ही महिला से दुर्व्यहार का आरोप लगा दिया था। महिला ने अल्मोड़ा पुलिस को शिकायती पत्र सौंपा था।
रुपये वापसी को लेकर हुआ था विवाद

पिछले साल मई में रकम वापसी का दबाव बनने पर अधिवक्ता महेंद्र ने फिर से शिक्षकों को हल्द्वानी बुलाया। शिक्षकों ने प्रतीक्षा के घर पर महेंद्र से मिलकर रुपये वापसी की मांग की। शिक्षक और अधिवक्ता के बीच विवाद हुआ था। उसके बाद अधिवक्ता ने रुपये लौटाने के लिए तीन माह का समय मांगा था।

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