
CM Yogi Adityanath
लखनऊ. सीएम योगी के गन्ना किसानों को दी गई सलाह इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। उन्होंने कहा था कि किसानों को सिर्फ गन्ना ही नहीं बल्कि सब्जियां या फिर अन्य फसलों को उगाना चाहिए। गन्ने की ज्यादा खेती से डायबिटीज हो सकता है। विपक्षी दलों के नेताओं ने इस पर तमाम सवाल भी उठाए लेकिन आंकड़े बता रहे हैं कि इस बार 18% रकबा बढ़ा है जिससे चीनी उत्पादन में 10 प्रतिशत बढ़ोत्तरी होगी। ऐसे में सरकार के लिए किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान करना आसान नहीं होगा। चीनी उद्दोग व गन्ना विकास विभाग के आंकड़े बता रहे हैं कि सीए योगी की चिंता जायज है।
दरअसल आंकड़ों के मुताबिक यूपी में साल 2016-17 में 23 लाख हेक्टयर गन्ने की जो खेती होती थी वे 2017-18 के बीच 27 लाख हेक्टेयर पहुंच गई। चार लाख हेक्टेयर गन्ने की खेती साल भर में बढ़ गई। वहीं इसी समय में महाराष्ट्र में 7.75 लाख हेक्टयर से 9.15 लाख हेक्टेयर हुई। वहीं कर्नाटक में 4.1 लाख हेक्टेयर से बढ़कर सिर्फ 4.15 लाख हेक्टेयर की खेती हुई। इस लिहाज से यूपी में सबसे अधिक गन्ने की खेती में बढ़ोत्तरी हुई। यही कारण है कि चीनी का उत्पादन उस साल 18% बढ़ा।
इस बार भी बढ़ सकता है सैप
इस बार भी चीनी उत्पादन 120 लाख टन से बढ़कर 130 लाख टन होने वाला है। इस कारण स्टेट एडवाइजरी प्राइस बढ़ सकता है। वहीं पिछले साल भी गन्ने की खेती में सरकार ने गन्ना किसानों का खरीद मूल्य बढ़ा दिया था। स्टेट एडवाइजरी प्राइस (सैप) ने गन्ना किसानों के तीन तरह के गन्नों की खरीद में 10 रुपये की बढ़ोत्तरी की।उच्च गुणवत्ता वाले गन्ने का मूल्य 315 रुपये से बढ़ाकर 325 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। वहीं सामान्य गुणवत्ता वाले गन्ने का मूल्य अब 305 रुपये प्रति क्विंटंल से बढ़कर 315 रुपये हो गया है। सैप ने सबसे कम गुणणवत्ता वाले गन्ने का मूल्य 300 रुपये से बढ़ाकर 310 रुपये प्रति क्विंटंल किया था। 2019 लोकसभा चुनाव के मद्देनजर इस और बढ़ाया भी जा सकता है।
आंकड़े
साल 2016-17 2017-18 (लाख हेक्टेयर गन्ने की खेती)
यूपी - 23 27
महाराष्ट्र -7.75 9.15
कर्नाटक- 4.1- 4.15
सरकार देगी राहत
गन्ना विकास मंत्री सुरेश राणा ने कहा है कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगा कि आगामी अक्तूबर में चीनी मिलों में पेराई आरंभ होने से पहले किसानों को उनके गन्ने का पुराना 10,000 करोड़ रुपए का पूरा बकाया चुका दिया जाए। उन्होंने कहा कि आने वाले सप्ताह में सहकारी और निजी क्षेत्र की मिलों पर गन्ने की बकाया राशि का निपटान करने के लिए 5,535 करोड़ रुपये की मदद का पैकेज मंत्रिमंडल के समक्ष पेश किया जाए। राणा ने कहा कि राज्य सरकार ने गन्ना बकाया राशि के प्रत्यक्ष भुगतान के लिए सहकारी मिलों को 1,010 करोड़ रुपये, सरकारी मिलों को 25 करोड़ रुपये और निजी मिलों को 500 करोड़ रुपए प्रदान करने की योजना बनाई है। निजी मिलों को आसान शर्तों पर 4,000 करोड़ रुपए की ऋण सहायता उपलब्ध करवाएगी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ने 2017-18 सत्र (अक्टूबर-सितंबर) में देश में 3.2 करोड़ टन चीनी उत्पादन में 38 प्रतिशत योगदान किया। उन्होंने कहा कि फसल अच्छी होने तथा चीनी का पड़ता बेहतर होने से चीनी का उत्पादन बढ़ा है। इस उत्पादन के कारण सरकार की चिंताएं भी बढ़ी हैं।
विपक्ष ने सरकार को घेरा था
सीएम योगी के बयान पर सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा था कि सरकार गन्ना बकाया भुगतान पर जिस तरह गन्ना किसानों का विरोध झेल रही है, उस आग में अब मुख्यमंत्री ने यह कहकर घी डाल दिया है कि गन्ना न उगाएं, इससे डायबीटीज बढ़ती है। इससे अच्छा है कि वह एक सलाह अपने समर्थकों को दें कि वे समाज में हिंसा-नफरत की कड़वाहट न घोलें।वहीं कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. हिलाल अहमद ने कहा कि सीएम का बयान न सिर्फ गैर जिम्मेदाराना है इसमें भारतीय जनता पार्टी के षडयंत्र की बू आती है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने जारी बयान में कहा कि यूपी के गन्ना किसानों का चीनी मिलों पर लगभग तीस हजार करोड़ रूपये बकाया है लेकिन प्रदेश सरकार गन्ना किसानों के बकाये तीस हजार करोड़ के सापेक्ष मात्र पांच सौ करोड़ रूपये की व्यवस्था ही करा पायी है।
Published on:
14 Sept 2018 01:27 pm
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