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गांवों में परिवार के परिवार उजाड़ रहा ‘कोरोना’

उत्तर प्रदेश के तमाम जिलों के गांवों में बुखार और सांस लेने में दिक्कत के बाद ग्रामीणों की मौत हो जा रही है
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लखनऊ

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Hariom Dwivedi

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Updated: 6 May 2021, 4:37 PM IST

 Death rate increased in up village

गांवों में जांच का अनुपात बहुत कम है ऐसे में इसकी कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं हो रही है कि मौत की असली वजह क्या है

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
लखनऊ. यूपी के गांवों में हर दिन मृतकों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। गांवों में परिवार के परिवार उजड़ रहे हैं। बुखार और सांस लेने में दिक्कत के बाद ग्रामीणों की मौत हो जा रही है। मेरठ के शाजहांपुर कस्बे में अब तक 25 की मौत हो चुकी है, जबकि जिले के दौराला कस्बे और आसपास के गांवों से सिर्फ एक सप्ताह में ही 18 लोग दम तोड़ चुके हैं, जिनमें एक ही परिवार के तीन लोग शामिल हैं। वहीं, गोंडा के चकरौत गांव में एक ही परिवार के पांच लोगों सहित दो हफ्ते में 8 की मौत से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। बात सिर्फ मेरठ और गोंडा की नहीं है, प्रदेश भर के ग्रामीण क्षेत्रों का यही हाल है। अस्पताल पहुंचने से पहले ही लोग दम तोड़ रहे हैं। चूंकि, गांवों में जांच का अनुपात बहुत कम है ऐसे में इसकी कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं हो रही है कि मौत की असली वजह क्या है। हालांकि, लक्षण बताते हैं कि ज्यादातर मौतों की वजह कोरोना वायरस ही है।

गोंडा जनपद जनपद के कर्नलगंज कोतवाली क्षेत्र के चकरौत गांव में एक ही परिवार के जिन पांच लोगों की मौत हुई, उनमें 22 वर्षीय युवक सौरभ श्रीवास्तव का भी नाम है। दो सप्ताह के भीतर आठ अर्थियां निकलने से गांव में मातम का माहौल है। गांववालों के मुताबिक, इनमें कोरोना के लक्षण थे, लेकिन परिजन परिजन यह मानने को तैयार नहीं हैं कि मौत कोरोना की वजह से हुई है वहीं, मौत की वजह कोरोना है, प्रशासन ने भी इसकी पुष्टि नहीं की है। गोंडा के बीजेपी सांसद कीर्तिवर्धन सिंह ने अपनी फेसबुक पर इस परिवार की व्यथा लिखी तो मामला संज्ञान में आया था।

कोरोना टेस्ट कराने से कतराते हैं ग्रामीण
इन दिनों लगभग हर घर में कोई न कोई बुखार से पीड़ित है। बातचीत में सामने आया कि कोविड लक्षण होने के बावजूद ग्रामीण कोरोना टेस्ट नहीं कराते हैं। उन्हें भय है कि अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो उन्हें जानें किस अस्पताल भेज दिया जाएगा, जहां से जीवित बचके आ पाना मुश्किल होगा। इसलिए वह गांव में ही इलाज कराना पसंद करते हैं। हालांकि, कुछ का यह भी कहना है कि टेस्टिंग कहां कराएं? और अगर करा भी लें तो 4-6 दिन बाद रिपोर्ट आती है, तब तक कई सीरियस मरीजों की तो मौत हो जाती है।

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'भगवान' बने झोलाझाप डॉक्टर
ग्रामीण इलाकों में इन दिनों झोलाछाप डॉक्टर ही मरीजों के लिए भगवान बने हुए हैं। कोरोना महामारी के दौर में जब शहरों-कस्बों में डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिये तो गांव के डॉक्टर ही उनका ट्रीटमेंट कर रहे हैं। हरदोई जिले के भैनगांव निवासी अश्वनी कुमार लखनऊ में नौकरी करते हैं। गांव में अचानक पिताजी की तबियत खराब हो गई तो उन्होंने गांव के डॉक्टर से इलाज कराया। कहा कि लखनऊ में तो कोई देखने को भी तैयार नहीं है। ऐसे में वह गांव में ही स्वस्थ रहेंगे। कमोबेश हर गांव की यही कहानी है, लोग स्थानीय डॉक्टर से ही ट्रीटमेंट ले रहे हैं। चाहे वह स्वस्थ हों या नहीं।

गांव-गांव में कोविड टेस्टिंग अभियान शुरू
बढ़ते कोरोना को देखते हुए योगी आदित्यनाथ सरकार गांवों में विशेष कोविड टेस्टिंग अभियान चला रहा है। 5 मई से शुरू हुए इस अभियान के तहत गांवों में 10 लाख से अधिक एंटीजन टेस्ट कर गांवों में कोरोना की घुसपैठ को रोका जाएगा। कोविड टेस्टिंग अभियान का यह अभियान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की देखरेख मेडिकल स्टाफ, आशा वर्कर और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के जरिए चलाया जा रहा है। एंटीजन टेस्ट में जो ग्रामीण कोरोना संक्रमित पाया जाएगा, उसका गांव में ही तत्काल इलाज शुरू किया जाएगा। कोरोना संक्रमित ग्रामीण को इलाज के लिए दवाई वाली एक कोविड किट और आयुष काढ़ा दिया जाएगा।

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