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टीबी मरीजों का ध्यान रखने वाले कैमिस्टों, डॉक्टरों और हेल्थ वर्कर्स को सरकार देगी इनाम

मरीज का इलाज पूरा कर रोगी को क्योर करने वाले डॉक्टर को 500 रूपये अलग से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
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tuberculosis

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लखनऊ. टीबी के मरीजों को चिह्नित करने और उनको बेहतर उपचार प्रदान करने के मकसद से सरकार ने एक ओर जहां बीमारी की जानकारी न देने वाले डॉक्टरों, कैमिस्टों और हेल्थ वर्कर्स के लिए सजा का प्रावधान किया है तो जागरूकता पर प्रोत्साहन राशि देने की भी व्यवस्था की है। दरअसल सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद क्षय रोगियों को मुफ्त की जांच व इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है। ऐसे में रोगियों में क्षय ड्रग रेजिस्टेंस के कारण रोगियों के बढने का खतरा बढ़ रहा है।

जानकारी में आनाकानी पर होगी सजा

लखनऊ के जिला क्षय अधिकारी डॉ बीके सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य परिवार एवं कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के गजट नोटिफिकेशन के अनुसार सभी स्वास्थ्य प्रदाताओं - सरकारी, स्वंयसेवी, प्राईवेट, क्लीनिक लैब, हॉस्पिटल, फार्मेसी कैमिस्ट एवं दवा विक्रेता के द्वारा रोगी से सम्बन्धित सारी जानकारी न देने पर दो साल की सजा हो सकती है। यह जानकारी हर सप्ताह मुख्य चिकित्सा अधिकारी औऱ जिला क्षय रोग अधिकारी अथवा प्रभारी चिकित्सा अधिकारी के पास जमा करना अनिवार्य है।

जागरूक हेल्थ वर्कर्स को इनाम

डॉ सिंह ने बताया कि जिला क्षय रोग अधिकारी को ई-मेल के माध्यम से भी जानकारी भेज सकते हैं। कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही किये जाने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 269 और 270 के उपबंधो के तहत दो वर्षों तक कारावास या जुर्माना व सजा का प्रावधान किया गया है। सिंह ने यह भी बताया कि यदि कोई भी मरीज प्राईवेट या सरकारी अस्पताल या क्लीनिक से आता है तो उसे 50 रूपये प्रति माह पोषण भत्ते के रूप में दिया जाएगा। इसके अलावा जो भी प्राइवेट डॉक्टर, क्लीनिक व फार्मेसी कैमिस्ट मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में जानकारी देगा, उसको 100 रूपये प्रोत्साहन राशि के रूप में और मरीज का इलाज पूरा कर रोगी को क्योर करने वाले डॉक्टर को 500 रूपये अलग से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

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