
dispute on Lalji Tandon's book Ankaha Lucknow
अनिल के. अंकुर
लखनऊ। लखनऊ की जनता उन्हें अपना अभिभावक मानती है। वे डांट भी दें तो कोई बुरा नहीं मानता। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष अगर उन्होंने कह दिया तो उनकी बात का सम्मान होता है। ये कोई और नहीं, सादगी में जीवन बिताने वाले पूर्व मंत्री पूर्व सांसद और बिहार के नव नियुक्त राज्यपाल लालजी टंडन हैं। कभी मंत्री के रूप में, कभी भाजपा के प्रवक्ता के रूप में रोज मीडिया में चर्चा में रहते थे। कभी अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाकर तो कभी बसपा सुप्रीमो मायावती के भाई बनकर सुर्खियां बटोरने वाले खुश मिजाज टंडन आज राज्यपाल बनते ही गंभीर हो गए हैं। हाल में ही उन्होंने अनकहा लखनऊ नाम से किताब लिखकर लखनऊ के नाम का एक विवाद पैदा किया। लखनऊ नहीं, लक्षमण के नाम से बना था लखनपुरी। किताब के मुताबिक यही था लखनऊ का असली नाम। बिहार के राज्यपाल बनने के बाद पत्रिका ने उनसे बात की। पेश हैं अंश-
प्रश्न- राज्यपाल बनने के बाद आपको कैसा महसूस हो रहा है?
उत्तर- बहुत अच्छा। इससे बड़ी क्या बात हो सकती है मेरे लिए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुझपर भरोसा किया। अब बारी मेरी है। मैं उनके भरोसे पर खरा साबित होऊंगा।
प्रश्न- क्या आपको पहले मालूम था कि आप राज्यपाल बनाए जाने वाले हो?
उत्तर- 2014 में भाजपा सरकार बनने के बाद मुझे राज्यपाल बनाए जाने के लिए कहा गया था। मैंने उस वक्त अपने निजी कारणों से मना कर दिया था। अब फिर मेरे पास संदेश आया है तो उसका निर्वाह्न करूंगा।
प्रश्न- आप ने अपनी राजनीति जमीन से शुरू की। सभासद से मंत्री और अब राज्यपाल। कैसे सामंजस्य रखेंगे इस संवैधानिक पद पर?
उत्तर- देखिए मंत्री और अन्य पदों की अलग गरिमा होती है। वहां उसके हिसाब से काम करना होता है। और जहां तक राज्यपाल पद की बात है। यह एक संवैधानिक पद है। इसकी गरिमा अलग प्रकार की है। उसका पूरा सम्मान किया जाएगा।
प्रश्न- लखनऊ आप की जन्म स्थली है। यूपी आपकी कर्मभूमि रही है। अब बिहार चले जाएंगे तो यूपी को कितना मिस करेंगे?
उत्तर- जाहिर है कि यूपी और फिर लखनऊ हमें याद आएगा। लेकिन एक चुनौती भरा काम मिला है। इसमें हम खरा उतरेंगे।
प्रश्न- बिहार की सियासत और वहां के हालात से आप अवगत होंगे। काम करने की कितनी गुंजाईश है आपके लिए?
उत्तर- देखिए वहां नितीश सरकार का अच्छा काम चल रहा है। हमारी कोशिश होगी कि और अच्छा काम वहां हो। हम भी वहां के विकास के लिए पूरा सहयोग करेंगे।
प्रश्न- आपने अनकहा लखनऊ किताब लिखी थी। अब बिहार में क्या लिखेंगे?
उत्तर- लिखने का मन बहुत करता है। वहां भी मौका निकालूंगा और इसका अगला पार्ट लिखूंगा।
प्रश्न-बिहार के लिए कोई संदेश देंगे आप?
उत्तर- बिहार के लोग बहुत ही संजीदा होते हैं। देश के पहले राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद भी बिहार से थे। इतने होशियार कि परीक्षा में सारे सवाल हल करने के बाद लिखा कोई पांच जांच लें। बिहार के लोग योग्य लोग होते हैं। उनसे उम्मीद है कि वे प्रदेश के विकास में अपनी योग्यता का और सहयोग दें।
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Updated on:
22 Aug 2018 12:43 pm
Published on:
22 Aug 2018 11:58 am
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