Motivational Story : अपनी सोच को रखें मजबूत, बड़ी से बड़ी कठनाई भी लगेगी छोटी, खुशियां भागेंगी आपके पीछे

Motivational Story : अपनी सोच को रखें मजबूत, बड़ी से बड़ी कठनाई भी लगेगी छोटी, खुशियां भागेंगी आपके पीछे

Hariom Dwivedi | Updated: 08 Aug 2019, 05:27:00 PM (IST) Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

- बेहतर की चाहत में वर्तमान में भी जीना भूल जाते हैं लोग
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डॉ. उरुक्रम शर्मा
खुशी की तलाश में इंसान कहां-कहां भटकता है, लेकिन उसे खुशी नहीं मिलती है, क्योंकि उसकी दौड़, महत्वाकांक्षा लगातार बढ़ती जाती है। व्यापारी रोज से ज्यादा आय में खुशी ढूंढता है, नौकरीपेशा ज्यादा सैलेरी और प्रमोशन में सिमट जाता है। कोई दूसरे से ज्यादा आगे बढ़ने की होड में खुशी को पीछे छोड़ जाता है। इसी तरह का एक वाक्या सामने आय़ा। विवेक नौकरी पेशा युवक है और हमेशा खुशी की आस में दुखी रहता है। एक दिन वह इतना दुखी हो गया कि संत के पास गया और उसने कहा, खुशी का और मेरा दामन एक सा नहीं है। मैंने सोचा थी, मेरी माताजी-पिताजी को कार में चार धाम की यात्रा कराने जाऊंगा, लेकिन जब तक कार आती, उससे पहले ही उनका देहांत हो गया। हर साल सोचता हूं कि इस साल सैलेरी अच्छी बढ़ेगी, प्रमोशन होगा, ताकि परिवार सहित कहीं दूर देश में घूमने जाऊंगा। इस साल भी अप्रेजल का टाइम निकल गया। परिवार साथ घूमने का ख्वाब अधूरा रह गया।

 

संत बढ़े ध्यान से विवेक की बातें सुन रहे थे। वो अपने आश्रम के पीछे बने बगीचे में उसे ले गए। उसे कहा, जो भी फल-सब्जी तुम्हें पसंद आए, उसे तोड़ लेना, लेकिन तोड़ना एक ही। साथ ही शर्त रखी कि आगे बढ़ जाओ तो पीछे नहीं मुडना। विवेक संत के आदेश के अनुसार बगीचे में घूमने लगा। उसे बहुत ताजा ताजा फल नजर आए, लेकिन उसने किसी को नहीं तोड़ा और आगे बढ़ता रहा। बस जब वो आखिर में पहुंचा तो दो तीन फल बचे थे, जो कि ज्यादातर गले हुए थे, अब उसके पास कोई रास्ता नहीं था, उसने कम गला हुआ फल तोड़ और संत के पास चले गया। संत ने उसे देखकर कहा, तुम इतने ताजा ताजा फलों को छोड़कर औऱ अच्छे की लालसा में आगे बढ़ते रहे, लेकिन जब बगीचे का छोर खत्म होने वाला था तो तुमने जो मिला उसे ही ले लिया। तुमने जो अच्छे फल थे, उन्हें पाने की चाहत थी, उन्हें देखकर तुम खुश हो रहे थे, लेकिन और खुशी के चक्कर में सबको खोते रहे।

 

जिन्दगी के सफर में हमें खुशी की तलाश होती है, लेकिन जो छोटी छोटी सी खुशी हमें मिलती है, उसे गंवा देते हैं बड़ी खुशी की लालसा में। वो मिलती है या नहीं लेकिन तब तक हमारा समय पूरा हो जाता है, इसके लिए जरूरी है कि मंजिल की खुशी की आस में सफर की खुशियों को नहीं गंवाना चाहिए। जो मिल रहा है, उसमें खुशी तलाशना जरूरी है, जो नहीं है उसके बारे में सोचकर अपनी खुशी को नहीं गंवाना चाहिए।

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