कॉमर्स में है जबरदस्त कॅरियर, मिलेंगे ढेरों जॉब्स, स्टार्टअप्स के ऑप्शन्स

Career in Commerce: कॉमर्स हर बिजनेस का एलिमेंट्री पार्ट है जो लीगल, सोशल, पॉलिटिकल, टेक्निकल और सोशल पार्ट को काफी हिस्से तक कवर करता है। वैसे तो इस फील्ड में काफी कॅरियर ऑप्शन होते हैं, लेकिन इनमें कुछ प्रमुख कोर्स है।

Career in Commerce: कॉमर्स हर बिजनेस का एलिमेंट्री पार्ट है। जो लीगल, सोशल, पॉलिटिकल, टेक्निकल और सोशल पार्ट को काफी हिस्से तक कवर करता है। कॉमर्स इंडिया में 12वीं के स्टूडेंट्स के बीच एक लोकप्रिय स्ट्रीम है। 12वीं क्लास के बाद स्टूडेंट्स में कॅरियर और हायर स्टडीज को लेकर ऑप्शन चुनने का कन्फ्यूजन रहता है। वैसे तो इस फील्ड में काफी कॅरियर ऑप्शन होते हैं, लेकिन इनमें कुछ प्रमुख कोर्स है।

चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए)
द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आइसीएआइ) चार्टर्ड अकांउंटेंट का कोर्स करवाता है। हर बड़ी कंपनी में चार्टर्ड अकाउंटेंट का रोल बहुत अहम होता है और आज के समाज में इस पेशे को बहुत इज्जत से देखा जाता है। सीए कोर्स के लीए छात्रों की अकाउंटिंग में मजबूत पकड़ होनी चाहिए। इस कोर्स के बाद स्टूडेंट्स को करीब 10 लाख का एनुअल पैकेज मिल जाता है

कंपनी सेक्रेटरी (सीएस)
इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया की ओर से चलाए जाने वाले इस कोर्स में तीन चरण होते हैं। बढ़ती इकोनॉमी में आज सीए का अच्छा स्कोप है

बीबीए
यह तीन साल का कोर्स है, इसमें स्टूडेंट्स को बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन के गुर सिखाए जाते हैं। ग्लोबल इकोनॉमी होने और बिजनेस ओरिएटेंड सोसायटी को देखते हुए बीबीए स्टूडेंट्स के लिए अच्छा कॅरियर ऑप्शन साबित हो सकता है।

एक्चुअरी
यह एक प्रोफेशनल कोर्स है, जो जोखिम और अनिश्चितता के वित्तिय प्रभाव से संबंधित समस्याओं को समझने, उनका मूल्यांकन करने और व्यावसायिक समस्याओं को हल करने के लिए मॉडल बनाने के लिए सांख्यिकी और गणित के फॉर्मूले का उपयोग करते हैं।

कॉस्ट एंड वर्क अकाउंटेंट (सीडब्लूए)
कॉस्ट अकाउंटेंसी का कोर्स द इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट एंड वक्र्स अकाउंटेंट ऑफ इंडिया की ओर से करवाया जाता है। व्यवसाय मूल्यांकन मॉडलिंग सिलेबस पार्टिसिपेंट्स को तीन मुख्य तरीकों का उपयोग करके विस्तृत व्यापार मूल्यांकन मॉडलिंग करने के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करता है। चार्टर्ड फाइनेंशियल एनालिस्ट (सीएफए) चार्टर्ड अकाउंटेंसी के लोकप्रिय पाठ्यक्रमों में से एक है।

कॉमर्स ग्रेजुएट्स की बढ़ी डिमांड
इनके अलावा बीकॉम, बीकॉम (ऑनर्स), बीकॉम (बैंकिंग एंड इंश्योरेंस) एवं बीकॉम (अकाउंटिंग एंड फाइनेंस) जैसे थ्री ईयर डिग्री कोर्स प्रोग्राम भी कॅरियर के हिसाब से अच्छे ऑप्शन साबित हो सकते हैं। वहीं जीएसटी लागू होने के बाद कॉमर्स ग्रेजुएट्स की डिमांड बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं और उनकी सैलेरी में भी अच्छा हाईक आया है। अब हर कंपनी छोटे-छोटे कामों के लिए सीए के साथ अब दूसरे प्रोफेशनल को भी हायर कर रही हैं।

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सुनील शर्मा
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