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डॉ. एस. के. राव ग्वालियर कृषि विवि के कुलपति नियुक्त

डॉ. एस.के. राव को राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर के कुलपति के पद पर नियुक्त किया गया है।

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Jameel Ahmed Khan

Oct 02, 2017

Gwalior Agriculture university

Gwalior Agriculture University

भोपाल। मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर डॉ. एस. के. राव की नियुक्ति की गई है। कुलपति की नियुक्ति कुलाधिपति व राज्यपाल ओम प्रकाश कोहली ने की है।

आधिकारिक तौर पर दी गई जानकारी के मुताबिक, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, हैदराबाद के पूर्व निदेशक डॉ. एस.के. राव को राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर के कुलपति के पद पर नियुक्त किया गया है। कुलाधिपति व राज्यपाल कोहली द्वारा जारी नियुक्ति आदेश के मुताबिक, डॉ. राव की नियुक्ति कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से पांच वर्ष की अवधि के लिए की गई है।

नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति में अनियमितता
नई दिल्ली। बौद्धिक, दाशर्निक एवं आध्यात्मिक अध्ययन के अंतरराष्ट्रीय केंद्र नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति और विशेष कार्याधिकारी की नियुक्ति और वेतन में अनियमितताएं बरतीं गईं तथा अब तक विश्वविद्यालय परिसर का निर्माण कार्य नहीं शुरू हुआ। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की संसद में पेश ताजा रिपोर्ट के अनुसार में अब तक विश्वविद्यालय नियमित संचालक मंडल का गठन नहीं किया गया तथा अकादमिक स्टाफ की नियुक्ति के लिए नियम भी नहीं बनाए गए हैं।

विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों का पंजीकरण भी अनुमान से बहुत कम रहा है। विदेश मंत्रालय के तहत बिहार के राजगीर में विश्वविद्यालय की स्थापना 2010 में बाकायदा एक कानून पारित करके की गई। कानून की धारा 15(1) के अनुसार विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति विजिटर यानी राष्ट्रपति संचालक मंडल की सिफारिश पर कम से कम तीन लोगों के एक पैनल में से करेगा। कैग ने अपनी पड़ताल में पाया कि संचालक मंडल की बजाय नालन्दा परामर्शदाता समूह ने कुलपति के रूप में तीन के बजाय डॉ गोपा सभरवाल के रूप में एक ही व्यक्ति के नाम की सिफारिश कर दी।

परामर्शदाता समूह नवंबर 2010 में संचालक मंडल में बदल दिया गया था और उसे कुलपति के नामों की सिफारिश की शक्ति भी दी गई, लेकिन परामर्शदाता समूह ने यह शक्ति मिलने से चार माह पहले ही अगस्त 2010 में डॉ सभरवाल के नाम की सिफारिश कर दी थी। इस प्रकार कुलपति के रूप में डॉ सभरवाल की नियुक्ति में अनियमितता बरती गई। इसके बाद संचालक मंडल ने बिना किसी लिखित रिकॉर्ड के मनमाने तरीके से उनका वेतन दो लाख रुपए प्रति माह से बढ़ाकर ३.५ लाख रुपए कर दिया।

विश्वविद्यालय में विशेष कार्य अधिकारी (विश्वविद्यालय विभाग) के पद का प्रावधान नहीं था। इसके बावजूद अनियमितता बरतते हुए डॉ. अंजना शर्मा की दो लाख रुपए मासिक वेतन पर इस पद पर नियुक्ति की गई। बिहार सरकार ने विश्वविद्यालय परिसर के लिए 2011 में ही 450 एकड़ जमीन आवंटित कर दी थी तथा केंद्र ने इस परियोजना के वास्ते 2010 से 2021 तक के लिए 2727 करोड़ रुपए का आवंटन भी कर दिया था, लेकिन मार्च 2016 तक परिसर की सिर्फ चहारदीवारी का ही निर्माण हुआ। कैग ने चहारदीवारी के निर्माण और परिसर के पहले चरण के निर्माण की निविदा में भी अनियमितता पाई है।