
जानिए, सड़कों और रेलवे स्टेशन पर कचरा बिनने वाला लड़का कैसे बन गया करोड़पति
एक पुरानी कहावत है कि इंसान की मेहनत कभी भी बेकार नहीं जाती है। यदि कोई व्यक्ति किसी काम के लिए दिल से मेहनत करता है उसे एक न एक दिन सफलता जरूर मिलती है। यह कहावत एक अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त फोटोग्राफर विक्की रॉय पर बिल्कुल फिट बैठती है। पश्चिम बंगाल के पुरुलिया गांव में एक बेहद निर्धन परिवार में जन्म लेने वाले विक्की ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि एक दिन वह इतना बड़ा आदमी बन जाएगा। लेकिन उसकी मेहनत और काम करने की लगन ने आज उसे इस मुकाम तक पहुंचा दिया।
विक्की के बचपन की स्टोरी जानकर एक बार के लिए आपकी भी रूह कांप उठेगी। विक्की के परिवार की माली हालत इतनी खराब थी कि उसके मां—बाप ने उसे नाना नानी के यहां छोड़ दिया था। लेकिन वहां भी विक्की के साथ बहुत अत्याचार होता था। दिन भर काम करने के बावजूद छोटी मोटी बातें के लिए उसके साथ बुरी तरह मारपीट की जाती थी। इन्हीं चीजों से तंग आकर उसने वहां से भागने का फैसला किया और साल 1999 में मात्र 11 वर्ष की उम्र में दिल्ली चला आया। वहां आकर वह रेलवे स्टेशन और सड़कों पर कचरा बिनकर अपना गुजरा करने लगा।
लेकिन इसके काम से भी उसके खर्चो की पूर्ति नहीं होने के कारण वह एक होटल में वेटर की नौकरी करने लगा। होटल में नौकरी करते हुए उस पर एक सज्जन की नजर पड़ी। उन्होंने विक्की को समझाते हुए कहा, बेटा यह तुम्हारे काम करने की नहीं बल्कि पढ़ाई करने की उम्र है। तब विक्की ने उस सज्जन को अपनी माली हालत के बारे में बताया। इसके बाद उस व्यक्ति ने विक्की का दाखिला 'सलाम बालक ट्रस्ट' नाम की संस्था में करवा दिया। यहां उसे छठवीं कक्षा में एडमिशन मिल गया। यहां से उसने 10वीं तक पढ़ाई की। लेकिन 10वीं में अच्छे अंक नहीं आने की वजह से वह निराश हो गया और उसने किसी दूसरी लाइन में अपना करियर बनाने का फैसला किया।
उसके बाद 2004 में ट्रस्ट के अंदर ही एक फोटोग्राफिक वर्कशॉप का आयोजन हुआ था, जिसमें एक ब्रिटिश फोटोग्राफर पिक्सी बेंजामिन (pixy benjamin) आए थे और विक्की ने फोटोग्राफी में इतनी दिलचस्पी दिखाते हुए उनसे फोटोग्राफी सीखने का आग्रह किया लेकिन विक्की को उनके साथ काम करने में परेशानी हुई है क्योंकि उसे इंग्लिश नहीं आती थी। लेकिन विक्की ने हार नहीं मानी। इसी बीच संयोग से एक दिन उसकी मुलाकात एनी मान नाम की फोटोग्राफर से हुई। उसने विक्की को अपने पास काम पर रखा और उसे 3000 रुपए महीने की सैलरी भी देना शुरू कर दिया।
2007 में विक्की ने INDIA HABITAT CENTER में अपनी फोटोग्राफी की पहली exhibition लगाई जिसका नाम था STREET DREAMS, जिससे विक्की को काफी पॉपुलरटी हॉसिल हुई। इसके बाद उन्हें रामनाथ फाउंडेशन के लिए फोटोग्राफी करने का ऑफर मिला और वो भारत से बाहर चले गए। इंडिया आने के बाद उन्हें सलाम बालक ट्रस्ट की ओर से INTERNATIONAL AWARD FOR YOUNG PEOPLE और 2010 में BRAIN INDIA LADIES ASSOCIATION द्वारा YOUNG ACHIVERS से भी नवाजा गया।
2013 में विक्की का सिलेक्शन 8 अन्य फोटोग्राफरों के साथ मिशन कवर शॉट के लिए हुआ जिसके लिए वह श्रीलंका गए। इसी दौरान उन्होंने अपनी पहली किताब HOME STREET HOME लिखी जिसे NAZAR FOUNDATION ने पब्लिश किया। आज विक्की दुनिया के मशहूर इंटरनेशनल फोटोाग्राफरों की सूची में शुमार है।
Published on:
27 Jun 2018 02:24 pm
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