इस डॉक्टर ने कॉफी के बीज बेचकर कमाया पैसा, किया ये शानदार काम

डॉक्टर जो कॉफी के बीज बेचकर कई देशों में मरीजों की मदद करते हैं, मुनाफे का एक हिस्सा जरुरतमंद लोगों को कर देते हें दान, ग्राहकों को भेजते उनकी कहानी

फियो कॉफी का नाम उन्होंने अस्पताल में फियोक्रोमोसाइटोमा से पीडि़त मरीज को देखकर रखा। विभिन्न चिकित्सकों और वैज्ञानिकों के नाम पर उन्होंने अपने उत्पादों के नाम रखे हैं। साथ ही वे नाम से जुड़े आविष्कार की कहानी भी पैकिंग पर अंकित करते हैं।

चिकित्सक होने के बावजूद 32 साल के लैरी आइस्ट्रेल वर्जीनिया में इनोवा फेयरफैक्स अस्पताल के आसपास कॉफी के बीज बेचते हैं। दरअसल, डॉक्टर होने के साथ ही लैरी एक स्टार्टअप भी चलाते हैं। वे ‘फियो कॉफी’ के नाम से कॉफी बीज बेचते हैं। लैरी अपने स्टार्टअप से होने वाली कमाई का एक हिस्सा अफ्रीका और एशियाई देशों में जरुरतमंद लोगों की सर्जरी करवाने में आर्थिक मदद करते हैं।

फियोक्रोमोसाइटोमा नामक दुर्लभ ट्यूमर से पीडि़त एक महिला से प्रेरित हो उन्हें विचार आया कि लोगों को कम कार्बोहाइड्रेट आहार के बारे में बताएं। वे चार तरह की कॉफी के बीज (रोस्टेड) बेचते हैं। ग्राहकों को खरीदारी के साथ उस व्यक्ति की फोटो भी मिलती है जिसकी मदद उनकी खरीदी कॉफी के पैसों से की गई या होगी। वे 10 से ज्यादा लोगों की सर्जरी करवा चुके हैं। उन्होंने एक ऐप भी बनाई है जो खाने को देखकर उसकी पौष्टिकता के बारे में बता देती है।

खरीदार को देते हैं पूरी जानकारी
डॉ. लैरी को सैन फ्रांसिस्को स्थित एक परियोजना ‘वात्सी’ के जरिए इन देशों में रहने वाले लोगों की जरुरतों के बारे में पता चलता है। ग्राहक को आश्वस्त करने के लिए लैरी अपनी हर कॉफी डिलीवरी में मदद पाने वाले व्यक्ति की कहानी भी भेजते हैं। इसमें उस दिन की तारीख भी अंकित होती है जिस दिन फेयो ने वात्सी को पैसे दान किए थे। उनके विभिन्न स्टार्टअप में एक भी कर्मचारी नहीं है और वे ऑनलाइन ही काम करते हैं। कॉलेज में भी उन्होंने वजन घटाने के लिए आईफोन ऐप और स्पीकर वाला स्थेटेस्कोप बनाए थे।

17 साल की लडक़ी को बचाया
लैरी ने म्यांमार की खिन नाम की 17 वर्षीय लडक़ी के इलाज में भी मदद की जो हृदय की एक दुर्लभ बीमारी के साथ जन्मी थी। अगर जल्द इलाज न मिले तो जीवन खतरे में पड़ सकता है। उन्होंने मदद कर खिन को जीवनदान दिया। खिन अब स्वस्थ है और बड़ी होकर शिक्षक बनना चाहती है। लैरी ने मधुमेह और मोटापे के इलाज के लिए कम कार्बोहाइड्रेट आहार के लाभों पर दुनिया के अलग-अलग देशों में व्याख्यान दिए हैं।

उत्पादों के नाम भी हैं खास
फियो की ब्राजीलियन स्टाइल की कॉफी का नाम एक्स-रे की खोज करने वाले वैज्ञानिक विल्हेम रोंटजेन नाम के नाम पर है। ऐसे ही साउथ अमरीकन बटरफ्लाई कॉफी को उन्होंने आधुनिक नर्सिंग के संस्थापक फ्लोरेंस नाइटिंगेल के नाम पर रखा है। उनका डुलसी विट्रीओली एक मैक्सिको कॉफी बीज है। यह एक लैटिन वाक्यांश है जो विलियम टी.जी. मॉटर्न ने उपयोग किया था, जिन्होंने एनेस्थिसिया की खोज की थी।

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सुनील शर्मा
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