खेतों में पसीना बहा रहे किसान

मानसून का इंतजार, रोपा के लिए डाली धान

By: Mangal Singh Thakur

Published: 19 Jun 2021, 05:21 PM IST

मंडला. प्रदेश के पूर्वी जिलों में समय से पूर्व दस्तक दे चुके मानसून का जिले वासी बेसब्री से इंतजार है। आसमान में बादल तो बन रहे हैं लेकिन जरूरत के अनुसार बरस नहीं रहे हैं। जून का आधा माह बीत गया है। वैसे 15-16 जून तक मानसून आने की उम्मीद जताई जा रही थी। लेकिन समय निकलने के बाद भी उम्मीद के अनुसार बारिश नहीं हुई है। जिले में 18 जून तक 145 मिमी बारिश हो चुकी है जो कि पिछले वर्ष की अपेक्षा अधिक है। 2020 में 18 जून तक 128 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। फिर भी किसानों को झमाझम बारिश का इंतजार है। पिछले 10 वर्षों की बात की जाए तो 2012 और 2014 में 17 सौ मिलीमीटर से अधिक बारिश हुई थी। जबकि एक जून 2020 से 30 मई 2020 तक 1406 मिमी बारिश हुई है। इसके अलावा जिले में कम या औसत बारिश हुई है।


पिछले 2 वर्षों में मानसून जून के दूसरे पखवाड़े में क्षेत्र के कई हिस्सों में पहुंच गया था, तथा बोवनी लायक बारिश हो जाने से बीजों की बुआई कर ली गई थी। बीच का अंकुरण भी अपेक्षित हुआ था। मानसून की रूक-रूककर हुई बारिश से किसानों ने बुआई कार्य संपन्न कर लिया था। किसान इस वर्ष भी मानसून से यही अपक्षाएं लेकर बारिश की राह ताक रहा है। वैसे समूचे जिले में सभी किसानों के पास स्थाई सिंचाई के संसाधन नहीं है। सिंचाई वाले क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता से फसलों का उत्पादन लेने में किसान सफलता हासिल कर लेगा। वहीं सिंचाई के साधन विहीन क्षेत्र के किसान ये सब करने में नाकामयाब हो जाएंगे।


मानसून के आने के पूर्व खेत की जुताई व अन्य तैयारियों के साथ बीज की व्यवस्था भी करना किसान के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। शासन के पास बेहतर किस्म के बीज का टोटा है। हालांकि प्रदेश शासन का बीज विकास निगम अब खरीफ के चुनिंदा बीजों को उत्पादन करवाकर अपनी औपचारिक जिम्मेदारी निभा रहा है। क्षेत्र में अप्रमाणिक बीज धड़ल्ले से बीज कंपनियां बीज विक्रेताओं के जरिये किसानों को थमा रही है।


किसान तैयार कर रहे खेत
जिले के किसान दो माह का आराम करने के बाद अब फिर से खेती किसानी में जुट गए हैं। कोई बखरोनी कर रहा है तो कोई अपने खेत में गोबार खाद पहुंचा रहा है। मानसून का समय नजदीक आते ही किसान दिन रात मेहनत करने में जुट गए हैं। वहीं किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने भी किसानो को ज्यादा से ज्यादा लाभ पहुंचाने के लिए योजना तैयार कर ली है। खरीफ की फसल के लिए लगभग दो लाख 24 हजार हेक्टेयर रकबा निर्धारित किया गया है। जिसके लिए किसानो को निर्धारित दामो में खाद बीज भी उपलब्ध करा रहे हैं। इसके अलावा किसानो से लायसेंस युक्त कृषि सामग्री विक्रय केन्द्रों से ही खाद बीज लेने की बात कही गई है।

Mangal Singh Thakur
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned