पिता की उंगली छोड़ दौड़कर मां से लिपटा तीन साल का मासूम...और हो गया फैसला

मां-बेटे का प्यार देखकर हाईकोर्ट के जज (high court jujdge) ने बदला कुटुम्ब न्यायालय (family court ) का फैसला, मां को दी तीन साल के बच्चे की कस्टडी...

By: Shailendra Sharma

Updated: 03 Jul 2020, 04:24 PM IST

इंदौर. इंदौर हाईकोर्ट (high court) ने एक तीन साल के बच्चे (3 years old child) की कस्टडी (custody) उसके पिता (father) से लेकर मां (mother) को सौंप दी है। मामला मंदसौर से जुड़ा हुआ है जहां रहने वाले सूरज भाटी और सोनी भाटी की शादी 3 मई 2015 को हुई थी। शादी (marrige) के करीब दो साल बाद अप्रैल 2017 में एक बेटा हुआ लेकिन इसी दौरान पति-पत्नी के बीच विवाद शुरु हो गए, धीरे-धीरे विवाद इतना बढ़ गया कि पति पत्नी अलग रहने लगे और बच्चे की कस्टडी को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मंदसौर कुटुंब न्यायालय ने 6 जनवरी 2020 को बच्चे की कस्टडी मां की जगह पिता को सौंप दी और ये तय किया कि मां हर दूसरे शनिवार को बच्चे से एक निश्चित समय के लिए मिल सकती है।

लॉकडाउन में 'ममता' में रोड़ा बना पति
कुटुम्ब न्यायालय के फैसले के मुताबिक मां सोनी भाटी हर दूसरे शनिवार को अपने बेटे से मिलती थीं लेकिन इसी बीच कोरोना के चलते लॉकडाउन लग गया। लॉकडाउन के कारण बेटे से मिल पाने से बेचैन मां ने वीडियो कॉल कर उसे देखने के लिए पति को फोन लगाया पर पति सूरज ने फोन पर बच्चे से मां की बात नहीं कराई। इतना ही नहीं उसका नंबर तक ब्लैक लिस्टर कर दिया। बेटे से न मिल पाने से बेचैन मां ने वकीलों से बात कर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

 

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मां-बेटे का प्यार देख जज ने बदला 'फैसला'
बेटे से न मिलने वाली मां की याचिका पर हाईकोर्ट में जस्टिस एससी शर्मा के सामने सुनवाई हुई। कोर्ट रूम में ही मां को देखकर मासूम बच्चा दौड़कर उसकी गोद में चढ़ गया और काफी खुश नजर आया। मां-बेटे के प्यार को देखकर कोर्ट ने कुटुम्ब न्यायालय के फैसले को पलटते हुए कहा कि मां से बेहतर बच्चे की देखभाल कोई नहीं कर सकता है। अब हर दूसरे शनिवार को पिता दो घंटे के लिए अपने बेटे से मिल सकेगा।

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