प्याज अभी और ला सकता है आंखों में आंसू, दिसंबर तक राहत की कोई उम्मीद नहीं

  • बारिश की वजह से फसल खराब होने से कीमत में इजाफा होने की और उम्म्मीदें
  • निर्यात बैन करने के बाद भी देश में 30 से 40 फीसदी तक बढ़ गए प्याल के दाम

By: Saurabh Sharma

Published: 25 Sep 2020, 03:32 PM IST

नई दिल्ली। पिछले साल की तरह इस साल भी प्याज आम लोगों की जेबें ढीली करने के मूड में दिखाई दे रहा है। ताज्जुब की बात तो ये है कि निर्यात पर पाबंदी लगाने के बाद भी प्याज के दाम बीते एक सप्ताह में 15 से 20 रुपए तक बढ़ गए हैं। जबकि प्याज के उत्पादन में कोई कमी नहीं है, लेकिन मंडियों में आवक कम होने के बावजूद प्याज के दाम में इजाफा देखने को मिल रहा है। जबकि पिछले साल प्याज प्याज का उत्पादन कम हुआ था और आवक भी ज्यादा थी। जानकारों की मानें तो प्याज की कीमत में दिसंबर तक जारी रहने की संभावना जताई जा रही है। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर प्याज की खुदरा और थोक कीमतें कितनी हो गई हैं।

बीते सप्ताह में खुदरा की कीमतों में आई तेजी
बीते एक सप्ताह में बाकी सब्जियों और फलों की कीमतों में राहत देखने को मिली हो, लेकिनप्याज की कीमतों में इजाफा देखने को मिला है। देश की राजधानी दिल्ली में प्याज की कीमत पिछले सप्ताह के 35 रुपए के मुकाबले 55 रुपए से 60 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। जबकि प्याज के थोक दाम एक सप्ताह में 25 रुपए से 35 रुपए तक पहुंच गए हैं। जानकारों की मानें तो आने वाले दिनों में प्याज की कीमतों में और ज्यादा इजाफा देखने को मिल सकता है। ताज्जुब की बात तो ये है कि सरकार की ओर से प्याज के निर्यात पर पाबंदी लगाई हुई है, उसके बाद भी प्याज के दाम में इजाफा जारी है।

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प्याज की आवक कमजोर
मंडियों में भी प्याज की आवक पिछले साल के मुकाबले कमजोर देखने को मिल रही हैै। एशिया की सबसे बड़ी सब्जी मंदी आजादपुर में पिछले साल 25 सितंबर को प्याज की आवक 1198.3 टन थी। जबकि आज एक साल के बाद प्याज की की आवक 822.3 टन रह गई है।हैरानी की बात तो यह है कि पिछले साल प्याज का उत्पादन मौजूदा साल के मुकाबले कम था। आंकड़ों के अनुसार देश में बीते फसल वर्ष 2019-20 में प्याज का उत्पादन 267.4 लाख टन हुआ था, जबकि इससे पहले 2018-19 में 228.2 लाख टन प्याज का उत्पादन हुआ था। मतलब साफ है कि प्याज का उत्पादन ज्यादा होने के बाद भी कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। देश की सबसे बड़ी प्याज मंडी नासिक की बात करें तो प्याज का थोक भाव 14 सितंबर को 27 रुपए प्रति किलोग्राम था जो 25 सितंबर को 36 से 40 रुपए प्रति किलोग्राम पर आ गया है।

प्याज की कीमत में इजाफे की वजह
- व्यापारियों का आरोप है कि कीमतें बढ़ाने के लिए सट्टेबाजों ने बांग्लादेश में प्याज की भारी कमी का इस्तेमाल किया है।
- जून से अक्टूबर तक, भारत स्टोर किए गए प्याज का उपभोग करता है।
- खरीफ फसल की नई दक्षिणी राज्यों से आनी शुरू होती है और अगस्त से स्टॉक बढऩे लगता है।
- फसल के समय बारिश के कारण नई फसल के आगमन में व्यवधान, हमेशा अगस्त से सितंबर के दौरान कीमतों में वृद्धि होती है।

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दिसंबर तक कीमतों में जारी रह सकती है बढ़ोतरी
प्याज की कीमतों में दिसंबर तक इजाफा जारी रहने की संभावना जताई जा रही है। जिसकी सबसे बड़ी वजह बारिश से प्याज की फसल को नुकसान बताया जा रहा हैै। वहीं दूसरी ओर प्रमुख राज्यों में खरीफ की फसल में देरी के कारण भी प्याज की कीमत में इजाफा होने के आसार हैं। जानकारों की मानें तो दिसंबर तक प्याज की कीमत एक बार फिर से 90 रुपए से 100 रुपए प्रति किलो के आसपास पहुंच सकती है। कई राज्यों में तो इससे भी पार होने की आशंका है।

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