स्वयं प्रकट हुए बांके बिहारी
मथुरा के रेलवे स्टेशन से बांके बिहारी मंदिर की दूरी महज 15 किलोमीटर है। यमुना एक्सप्रेस वे से करीब 12 किलोमीटर पर बांके बिहारी का मंदिर स्थित है। ठाकुर बांके बिहारी के दर्शन करने के लिए देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालु यहां आते हैं और अपनी मनोकामना मांगते हैं। भगवान बांके बिहारी का स्वरूप स्वयं प्रकट है। इसे किसी कारीगर द्वारा निर्मित नहीं किया गया है। स्वामी हरिदास जी भगवान कृष्ण के अनन्य भक्त थे और वह भगवान की भक्ति किया करते थे। इसी से प्रसन्न होकर भगवान कृष्ण ने उन्हें दर्शन दिए और यह प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई। कहा जाता है कि बांके बिहारी मंदिर में जो प्रतिमा है, वह सिर्फ कृष्ण भगवान की नहीं है, बल्कि राधा और कृष्ण के मिलने से उत्पन्न हुई थी।