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लॉकडाउन में ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करके स्कूलों ने मांगी अभिभावकों से फीस, नहीं देने पर दी ये चेतावनी

Highlights पेरेंट्स को भेजे जा रहे मैसेज और किए जा रहे हैं फोन अभिभावकों ने की जिला प्रशासन से हस्ताक्षेप की मांग अभिभावकों ने कहा- लॉकडाउन में ठप हो गया कामकाज  
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मेरठ

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Sanjay Kumar Sharma

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Updated: 23 May 2020, 1:40 PM IST

meerut

मेरठ। कोरोना के संक्रमण से चल रहे लॉकडाउन के बीच स्कूल प्रबंधनों ने अभिभावकों को फरमान जारी करना शुरू कर दिया है। स्कूल धमकी दे रहे हैं कि अगर बच्चों की स्कूल फीस जमा नहीं की तो बच्चों को ऑनलाइन क्लास में बैठने से रोक देंगे। अभिभावक अब जिला प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि वह इस मामले में हस्ताक्षेप करे।

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बता दें कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कोई भी शैक्षिक संस्थान पेरेंट्स को लॉकडाउन पीरियड के दौरान फीस जमा करने के लिए मजबूर नहीं करेंगे। फीस नहीं जमा करने की स्थिति में छात्रों को ऑनलाइन कोर्स की सुविधा से भी वंचित नहीं किया जा सकता है। वहीं हरियाणा सरकार ने पिछले हफ्ते आदेश दिया था कि लॉकडाउन के समाप्त होने तक स्कूलों में फीस कलेक्शन की सभी गतिविधियों को रोक दिया जाए। मेरठ के अभिभावकों का कहना है कि यहां का प्रशासन आखिर ऐसा निर्णय क्यों नहीं ले रहा है। अभिभावक रमेश कुमार ने कहा कि जब गुडग़ांव और नोएडा के स्कूल ऐसा कर सकते हैं तो मेरठ के स्कूल क्यों नहीं कर सकते हैं। सरकार को लॉकडाउन के लिए राहत पैकेज की घोषणा करके स्कूलों की ओर से फीस तलबी का समाधान किया जाना चाहिए।

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रमेश एक प्राइवेट जाब करते हैं। जिनका बिजनेस लॉकडाउन की वजह से प्रभावित हुआ है। उनके दो बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढ़ रहे हैं जिनकी फीस जमा करने के लिए स्कूल की ओर से मैसेज भेजे गए हैं। एक अन्य अभिभावक ने अपनी चिंता साझा करते हुए कहा कि मुझे अपने दो बच्चों के लिए बस फीस के तौर पर 10-10 हजार रुपये देने पड़ते हैं। जब बच्चे बस का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो ऐसे में बस फीस वसूलना अनुचित है।

मेरठ पेरेंट्स एसोसिएशन ने भी डीएम को पत्र लिखा है और लॉकडाउन की अवधि तक स्कूल फीस जमा से राहत दिलाने का आग्रह किया है। एसोसिएशन ने अपने पत्र में कहा है कि क्योंकि छोटे और मध्यम उद्यमों से कमाई बंद हो गई है और लोगों ने जो बचाकर रखा था, उसे भी रोजाना की जरूरतों के लिए खर्च कर दिया है, ऐसे में लोगों को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। हम आग्रह करते हैं कि कम से कम तीन महीने के लिए फीस कलेक्शन पर रोक लगा दी जाए।

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प्राइवेट स्कूलों का कहना है कि लॉकडाउन की पीरियड कोई छुट्टी का समय नहीं है। स्टाफ जैसे स्कूल में काम करते थे, वैसे ही घरों पर कर रहे हैं बल्कि शिक्षकों का काम और मुश्किल हो गया है। 25 मार्च से देश में लॉकडाउन चल रहा है। स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी और सभी शैक्षिक संस्थान बंद हैं। इस बारे में जब एडीएम सिटी आलोक तिवारी से बात की गई तो उनका कहना था कि इस बारे में स्कूल संचालकों की बैठक बुलाई जाएगी और उसके आधार पर निर्णय लिया जाएगा।