
नई दिल्ली। देश भर में नेशनल मेडिकल कमीशन बिल 2019 ( NMC bill ) का विरोध कर रहे रेजिडेंट डॉक्टर्स ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया। वहीं, दिल्ली में डॉक्टरों का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन से मिलने पहुंचा। इस दौरान डॉ. हर्षवर्धन ने डॉक्टर्स से काम पर वापस लौटने की अपील की। उन्होंने कहा कि मैंने डॉक्टरों से मुलाकात कर बिल के कुछ प्रावधानों को लेकर उनकी गलतफहमी दूर की।
कार्य बहिष्कार कर हड़ताल पर बैठे ये डॉक्टर्स NMC बिल 2019 का विरोध कर रहे हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि अगर NMC बिल बिना संशोधन के पेश होता है तो वो अपनी हड़ताल अनिश्चितकालीन जारी रखेंगे।
रेजिडेंट चिकित्सकों के इमरजेंसी सेवाओं सहित सभी सेवाओं से हट जाने के कारण गुरुवार को एम्स सहित सरकारी अस्पतालों की सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हुईं। चिकित्सक ऐसा नेशनल मेडिकल कमीशन ( NMC Bill ) विधेयक का विरोध कर रहे हैं, उनका कहना है कि इससे नीम-हकीमों को बढ़ावा मिलेगा।
इस हड़ताल का आह्वान एनएमसी विधेयक के खिलाफ किया गया है, जिसे गुरुवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन द्वारा राज्यसभा में प्रस्तुत किया जाना है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ( AIIMS ) के अलावा इस हड़ताल से पड़ोसी सफदरजंग अस्पताल व दिल्ली के मध्य में स्थित राममनोहर लोहिया अस्पताल भी बुरी तरह प्रभावित है।
तीनों अस्पतालों में से खास तौर से एम्स व सफदरजंग में पूरे देश से हर रोज हजारों मरीज पहुंचते हैं।
सफदरंजग अस्पताल के रेजिडेंट्स डॉक्टर्स एसोसिएशन के प्रकाश ठाकुर ने कहा कि अगर विधेयक ( NMC Bill ) राज्यसभा में पारित हो जाता है तो हम अपना प्रदर्शन और तेज करेंगे। हर्षवर्धन ने बुधवार की रात किए गए एक ट्वीट में लोगों व मेडिकल बिरादरी को भरोसा दिया था कि विधेयक ऐतिहासिक साबित होता है।
आईएमए ने विधेयक ( NMC Bill ) को 'क्रूर' व 'जन विरोधी' बताया है। इसने एनएमसी विधेयक की धारा 32 को लेकर चिंता जताई गई है। यह धारा 3.5 लाख गैर चिकित्सक लोगों या सामुदायिक स्वास्थ्य प्रदाताओं को मॉर्डन मेडिसीन के प्रैक्टिस के लिए लाइसेंस देगी।
Updated on:
2 Aug 2019, 12:16 PM IST
Published on:
2 Aug 2019, 10:39 AM IST
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