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कठुआ मामले में आरोपी के वकील का बयान: ‘जिहादी मुख्यमंत्री हैं महबूबा मुफ्ती’

शर्मा ने जनजातीय समुदायों पर आरोप लगाया कि वो भूमि खरीदने के लिए उच्च कीमतों का हवाला देते हुए देश विरोधी इस्लामी संगठनों से मदद लेते हैं
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mahbuba mufti

श्रीनगर। कठुआ बलात्कार के मामले में अभियुक्त का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील अंकुर शर्मा ने कहा राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती एक जेहादी मुख्यमंत्री हैं जो जम्मू कश्मीर राज्य में कट्टरपंथ को बढ़ावा दे रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि वह राज्य में गो-हत्या और गो-वंश तस्करी को कानूनी प्रतिरक्षा देती है और वह जम्मू के हिंदू-वर्चस्व वाले क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय परिवर्तन के लिए इस्लामिक फासीवादी सांप्रदायिक एजेंडा का नेतृत्व कर रही है।"

मीडिया से बातचीत में अभियुक्त के वकील अंकुर शर्मा ने कहा कि "वह गाय वध और बोवाइन तस्करी के लिए कानूनी प्रतिरक्षा देती है। वह गुज्जर और बकरवाल समुदाय को आदिवासियों के रूप में संदर्भित करती हैं। वह मुसलमान लोगो को कानून अपने हाथ में लेने की खुली छूट देती हैं। वह इस्लाम-फासीवादी सांप्रदायिक एजेंडा का नेतृत्व कर रही है।" उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के हिन्दू बहुल जम्मू इलाके में सांप्रदायिक संतुलन बिगाड़ने के लिए एक धर्म विशेष के लोगों को परेशां किया जा रहा है और एक अन्य धर्म के लोगों को सारी सुविधाएं दी जा रही हैं। अमित शर्मा अपराध शाखा द्वारा इस केस में नामित संजी राम का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो आठ वर्षीय लड़की के बलात्कार और हत्या में मास्टरमाइंड के रूप में जाना जाता है।

देश के कोने कोने से समर्थन का दवा करते हुए शर्मा कहते हैं कि वह महाराष्ट्र में हिंदू महासभा के राष्ट्रपति और हिंदू संगठनों से विशेष कॉल प्राप्त कर रहे हैं। 31वर्षीय शर्मा ने कहा कि हिंदू एकता मंच से जुड़े थे, जिसे बलात्कार और हत्या मामले में आरोपी का समर्थन करने के बनाया गया है, वह इस मामले में सीबीआई जांच की मांग करती है। हिन्दू जागरण मंच को "शांतिपूर्ण और अहिंसक संगठन" कहते हुए उन्होंने कहा कि यह इस्लामी अतिवाद से लड़ने के लिए स्थापित किया गया है।

शर्मा ने जनजातीय समुदायों पर आरोप लगाया कि वो भूमि खरीदने के लिए उच्च कीमतों का हवाला देते हुए देश विरोधी इस्लामी संगठनों से मदद लेते हैं और बाजार मूल्य से दोगुने पर जमीन खरीदते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ऐसे गैर सरकारी संगठन हैं जो ओआईसी (इस्लामिक देशों के संगठन) की अध्यक्षता में इस्लामी वित्तीय संस्थाओं के साथ मिलकर हिंदू वर्चस्व वाले क्षेत्रों में भूमि खरीदने के लिए 40 प्रतिशत की सब्सिडी का भुगतान करते हैं। इससे पहले यह 25 प्रतिशत था।

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