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महाराष्ट्रः नरभक्षी बाघिन की जान बचाने के लिए आगे आए लोग, सुप्रीम कोर्ट में दया याचिका

हिंदुस्तान के इतिहास में शायद पहली बार किसी बाघिन की जान बचाने के लिए दया याचिका दायर की गई है। यह दया याचिका पशु अधिकार और वन्यजीव कार्यकर्ताओं द्वारा दायर की गई है।

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मुंबई। हिंदुस्तान के इतिहास में शायद पहली बार किसी बाघिन की जान बचाने के लिए दया याचिका दायर की गई है। यह दया याचिका पशु अधिकार और वन्यजीव कार्यकर्ताओं द्वारा दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय से यह गुहार महाराष्ट्र स्थित जिला यवतमाल के पंढ़ारवाड़ा में मौजूद एक आदमखोर बाघिन (T1) का जीवन बचाने के लिए लगाई है।

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 1 जून 2016 से लेकर 28 अगस्त 2018 तक पंढ़ारवाड़ा इलाके के रालेगांव तहसील में यह बाघिन तकरीबन 13 लोगों को अपना शिकार बना चुकी है। इस बाघिन का शिकार हुए ज्यादातर लोग चरवाहे थे और इन्हें जंगली इलाकों में अपनी जान गंवानी पड़ी। हालांकि वन विभाग के मुताबिक उसके पास इस बात का कोई सबूत नहीं है कि T1 बाघिन ने 13 लोगों पर हमला कर उनकी जान ली।

पिछले महीने यानी अगस्त की 4, 11 और 28 तारीख को जब तीन ग्रामीणों की मौत हो गई, तब इस बाघिन को मारने का तात्कालिक आदेश जारी किया गया। बाघिन को मारने के लिए हैदराबाद से शिकारियों की टीम बुलाई गई है। ग्रामीणों की मौत का जिम्मेदार T1 बाघिन और उसके आठ माह के दो शावकों का ठहराया गया है। बताया जा रहा है कि एक T2 बाघ भी यहीं रहता है।

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सुप्रीम कोर्ट में बाघिन के लिए दायर दया याचिका मध्य प्रदेश के भोपाल के प्रयत्न एनजीओ के कार्यकर्ता अजय दुबे और दिल्ली के टाइगर कैंपेन के सिमरत संधू की ओर से दायर की गई है। सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति मदन लोकुर, न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ के समक्ष T1 बाघिन की ओर से इस दया याचिका को पेश किया गया है। मंगलवार को इस मामले की सुनवाई होगी।

गौरतलब है कि देशभर के तमाम इलाकों में जहां जंगल नजदीक हैं, वहां से बाघ, तेंदुए शहरी इलाकों में आ जाते हैं और लोगों पर हमला कर देते हैं। वन विभाग के अधिकारी पुख्ता जानकारी होने के बाद आदमखोर जानवरों को मार देते हैं।

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