कोरोना काल में बना आंखों के इशारे से चलने वाला रोबोट, दिव्यांगों के लिए बनेगी वरदान, जानिए इसकी खासियत

Highlights
- आईआईएससी बंगलूरू (IISc Bangalore) के वैज्ञानिकों एक कामल कर दिखाया है
- वैज्ञानिकों ने बोलने और चलने के साथ हाथ-पैर पर नियंत्रण न होने की परेशानी से जूझने वाले अक्षम लोगों के लिए आंखों से नियंत्रित होने वाला रोबोट तैयार किया है
- इस रोबोट को नाम दिया है रोबोटिक बांह (Robotic arm), सेलेब्रल पाल्सी डिसऑर्डर (Cerebral palsy disorder) के मरीजों के लिए यह खोज वरदान साबित होगी

नई दिल्ली. वैज्ञानिक (Scientist) आज रोबोट (robot) के ज़रिये ज़िंदगी को बेहतर और आसान बनाने की कोशिश में लगे हुए है। इंसान अपने काम को आसान करने और जिंदगी को सुंदर बनाने के लिए तरह-तरह के रोबोट (Robot) बना रहा है और उनका इस्तेमाल कर फायदा भी उठा रहा है। इस सब में खास बात ये भी है कि रोबोट (Robot) ऐसे कामों के लिए भी बनाये जा रहे हैं जिसकी कल्पना करना भी कईयों के लिए नामुमकिन है।

इसके तहत आईआईएससी बंगलूरू (IISc Bangalore) के वैज्ञानिकों एक कामल कर दिखाया है। वैज्ञानिकों ने बोलने और चलने के साथ हाथ-पैर पर नियंत्रण न होने की परेशानी से जूझने वाले अक्षम लोगों के लिए आंखों से नियंत्रित होने वाला रोबोट तैयार किया है। इस रोबोट को नाम दिया है रोबोटिक बांह (Robotic arm)। सेलेब्रल पाल्सी डिसऑर्डर (Cerebral palsy disorder) के मरीजों के लिए यह खोज वरदान साबित होगी।

वरदान साबित होगा

रोबोटिक बांह (Robotic arm) उन लोगों के लिए मददगार साबित होगा जो शारीरिक समस्याओं से प्रभावित लोगों के लिए जॉयस्टिक (Joystick), माउस या ट्रैकबॉल (Mouse or trackball) , जैसे उपकरणों का संचालन मुश्किल होता है। ऐसे में आंख के इशारे से चलने वाली ये मशीन वरदान साबित होगी।

आंखों की हरकतों से करेगा काम

एक रिपोर्ट के मुताबिक इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज बंगलूरू (Indian Institute of Sciences Bangalore) के वैज्ञानिकों ने यह एक नॉन इंवेसिव इंटरफेस (Non-invasive interface) तैयार किया है, जो आंखों की हरकतों से संचालित हैड माउंटेड सिस्ट्म (Head mounted system) से लैस है। यह दूसरे उपकरणों से अलग है इसे वेबकैम (Web cam) और कंप्यूटर (Computer) से संचालित किया जाता है।

चेन्नई में शुरू हो गया उपयोग

शोध का नेतृत्व करने वाले प्रो. प्रदीप्ता विस्वास के मुताबिक सेलेब्रल पाल्सी से ग्रस्त लोग खासतौर पर विद्यार्थी अनियंत्रित गतिविधियों के कारण सामने दिखने वाले दृश्य क्षेत्रों में किसी एक बिंदु पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते। वह दृश्य क्षेत्र के हिस्सों को समान रूप से नहीं देख पाते। इसलिए शोधकर्ताओं ने प्रत्येक उपयोगकर्ताओं के लाइव फीड के विश्लेषण के लिए कंप्यूटर विजन और मशीन लर्निंग एल्गोरिद्म का उपयोग किया है। इसकी मदद से उपयोगकर्ता चीजों को उठाने और उसे इधर से उधर रखने का काम कर सकेंगे। फिलहाल इसे चेन्नई की विद्यासागर संस्था में लगाकर इसका उपयोग किया जा रहा है।

Ruchi Sharma
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